मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

सकारात्मक का महत्व !

एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं।अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए !

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। 

सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया.. अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था। 

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह बैल कुएँ के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया !

करोना की इस महामारी के संकट में हम सबके उपर बहुत तरह के नकारात्मक विचार ऐसे ही फेंके जा रहे है ऐसे में हम सबको हतोत्साहित होकर भय के कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ इस संकट का सामना करते हुए हर तरह के हम पर फेंके जा रहे नकारात्मक विचारों को झटक कर आगे बढ़ना है यह दिन भी गुजर जाएँगे सो मित्रों, सकारात्मक सोंचे,सकारात्मक लिखे,सकारात्मक पढ़े ,सकारात्मक जिए !

रविवार, 10 जनवरी 2021

वही तो गाता है ...

सुमधुर,
सनातन शाश्वत गीत 
हृदय के तारों पर 
वही तो गाता है 
सेकडों कंठों को 
अपना उपकरण बनाकर !
जिसमें से कोई एक कंठ 
किसी के 
सोए पड़े तारों को 
झनझना कर जगाता है !
हृदय के तारों पर 
गीत वही तो गाता है !

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !

बुढ़ापे को रिवर्स तो 
नहीं किया जा सकता 
पर हाँ 
चिड़चिड़े,सनकी,खूसट 
बुढा/बूढ़ी होने से 
खुद को 
बचाया जा सकता है 
थोड़े कलात्मक उपाय 
करके !
थोड़ा योग,प्रयोगी हो जाओ !
थोड़ा ध्यान,प्रेममय हो जाओ !
थोड़ा गीत,संगीतमय हो जाओ !
थोड़ा काव्यसे,रसमय हो जाओ !
सुख दुःख की बरसों की जमीं
गाठों को पिघलाकर 
थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !

गुरुवार, 29 अक्टूबर 2020

 थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !

बुढ़ापे को रिवर्स तो 

नहीं किया जा सकता 

पर हाँ 

चिड़चिड़े,सनकी,खूसट 

बुढा/बूढ़ी होने से 

खुद को 

बचाया जा सकता है 

थोड़े कलात्मक उपाय 

करके !

थोड़ा योग,प्रयोगी हो जाओ !

थोड़ा ध्यान,प्रेममय हो जाओ !

थोड़ा गीत,संगीतमय हो जाओ !

थोड़ा काव्यसे,रसमय हो जाओ !

सुख दुःख की बरसों की जमीं

गाठों को पिघलाकर 

थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !


गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

प्रार्थना ...

 करोड़ों लोग यूँही 

ईश्वर की प्रार्थना 

नहीं करते !

प्रार्थना शायद हमें 

मनवांछित परिणाम

देती है !

प्रार्थना शायद हमें 

 थोड़ा सा सुकून देती है !

किंतु,

जिन तथ्यों को जैसी है वैसी ही 

स्वीकार करने की बजाय 

उन तथ्यों से,अपने आप से 

प्रार्थना के माध्यम से 

     क्या हम 

पलायन नहीं करते ?

एक सुविधाजनक पलायन !


सोमवार, 20 अप्रैल 2020

उम्र वैसे ही उतरती है ....

कभी किसी 
सौम्य,सुंदर चेहरे पर 
उम्र वैसे ही उतरती है 
जैसे दिन के पश्चात 
सहज,प्राकृतिक रूप से 
साँझ का उतरना !

शनिवार, 18 अप्रैल 2020


सीमित के आगे
असीमित होकर
ऐसे ही विकसित
हुआ जा सकता है
जैसे किसी बुद्धिमान ने
एक छोटी रेखा को
बिना मिटायें
बिना चोट पहुँचायें
उसके आगे एक
लंबी रेखा खिंच दी !

सोमवार, 24 जून 2019

प्रशंसा मीठा नशा है … !


प्रशंसा के 
वाह-वाह के 
मीठे दो शब्द 
हमारी प्रतिभा 
को निखारते है
कुछ हद तक 
बात सही है !
लेकिन अति नशा 
हर चीज का 
बुरा होता  है 
प्रशंसा बड़ा ही 
मीठा नशा है 
चाहते हुए भी 
लौटाने का मन 
नहीं करता !
सोच समझ कर 
स्वीकार करना 
सौदा महंगा 
पड़ सकता है !
क्योंकि, 
प्रशंसक वही 

कहते है जो हमें
अच्छा लगता है 
वो नहीं जो 
सच है   … !!





शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

सूरज की दादागिरी !

उधर
पानी का स्तर
घट गया !
इधर
पानी को लेकर
झगड़े बढ़ गए
सप्लाई कम हुई !
ऐसे में देखिये
बढ़ गई
सूरज की दादागिरी !
किरण किरण
लिए संग
उलीच उलीच कर
जलाशयों से घर
ले जा रहा है
पानी  ... !

सोमवार, 4 मार्च 2019

बसंत ...!

नियमित समय पर
पिछले वर्ष भी
आया था बसंत
इस वर्ष भी आया है
अगले वर्ष भी आयेगा
इसमें ख़ास बात
 क्या है ?

जो पड़े है अपने ही
खोल में बंद उन अहंकारी
बीजों के लिए नहीं
जो बंद खोल को
सहजता से त्यागकर
मिट्टी में ख़ुद को
गलाते है !
सर्दी,गरमी,तेज़
बारिश को भी
प्रसन्नता से सहकर
अंकुरित होते है
जो आँधी,तूफ़ानों से
निडरता से लड़कर
पल्लवित,पुष्पित हो
हवाओं में अपनी
ख़ुशबू बिखराते है
उन फूलों के लिए ही
हर वर्ष आता है बसंत
यही ख़ास बात है !

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

अहंकार अमरबेल है !

किसी भी वृक्ष पर
फैली हुई अमरबेल
धीरे-धीरे उस वृक्ष का
सारा रस चूसकर
उसके जीवन को ही
लील लेती है !
दूर-दूर तक फैला
मैं मैं करनेवाला
हमारा अहंकार
अमरबेल ही तो है
जिसमें कोई जड़
नहीं दिखती !
उपरसे हरा भरा
भीतरसे रुखा सूखा
जीवन दिखता है
पर !

गुरुवार, 3 जनवरी 2019

गतांक से आगे ....

किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा है “बड़े अजीब से इस इस दुनिया के मेले है
यूँ तो दिखती भीड़ है लेकिन फिर भी सब अकेले है” !

बोधि वृक्ष के नीचे बैठे बुद्ध हमें अकेले दिखाई देते है लेकिन उनका अकेलापन हमारी तरह नहीं अपने आप में संपूर्ण है ! कहीं पढ़ा है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर अपने सृजन में इतने अधिक डूब जाते थे कि चार-चार दिन तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते थे उन्हें समय का बोध ही नहीं होता था ! उनका अकेलापन नकारात्मक नहीं सृजनात्मक है ! लेकिन हमारा अकेलापन बिलकुल उस शायर के कहे अनुसार है ! मन का ख़ालीपन जीवन की किसी कमी को दर्शाता है ! शायद यही कमी,यही अकेलापन हमें जीवन में भौतिक विकास के मार्ग पर भी ले जाता है ! किंतु भौतिक पृष्ठभूमि पर किया गया बाह्य विकास फिर से दुःख,तनाव,अकेलेपन के मार्ग पर ही बढते रहना वर्तुल पर घूमते रहना है !
फिर दुःख,तनाव,अकेलेपन से बचने का क्या कोई उपाय है ? उपाय तो हम सब अपने अपने तरीक़े से करते ही है,निर्भरता एक ऐसा ही उपाय है ! अध्यात्म के पास उपाय से बेहतर समाधान मिलता है क्योंकि अध्यात्म उपाय सुझाने के लिए अकेलेपन को कोई समस्या नहीं मानता ! अध्यात्म कहता है अकेलापन व्यक्ति के अस्तित्व का ही हिस्सा है भले ही
कितना ही पीड़ादायी,भयभित करने वाला क्यों न हो इससे बचने के लियें कोई उपाय करने नहीं चाहिये !
व्यक्ति को इस सत्य को जैसा है वैसा स्वीकारना होगा सामना करना होगा ताकि मन एक नई क्रांति से गुज़र सके,उसिको महान मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो Self Actualization  कहते है !
किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा है “बड़े अजीब से इस इस दुनिया के मेले है
यूँ तो दिखती भीड़ है लेकिन फिर भी सब अकेले है” !

बोधि वृक्ष के नीचे बैठे बुद्ध हमें अकेले दिखाई देते है लेकिन उनका अकेलापन
हमारी तरह नहीं अपने आप में संपूर्ण है ! कहीं पढ़ा है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर अपने सृजन में इतने अधिक डूब जाते थे कि चार चार दिन तक कमरे से बाहर नहीं निकलते थे उन्हें समय का बोध ही नहीं होता था ! उनका अकेलापन नकारात्मक नहीं सृजनात्मक है ! लेकिन हमारा अकेलापन बिलकुल उस शायर के कहे अनुसार है ! मन का ख़ालीपन जीवन की किसी कमी को दर्शाता है ! शायद यही कमी,यही अकेलापन हमें जीवन में भौतिक विकास के मार्ग पर भी ले जाता है ! किंतु भौतिक पृष्ठभूमि पर किया गया बाह्य विकास फिर से दुःख,तनाव,अकेलेपन के मार्ग पर ही बढते रहना वर्तुल पर घूमते रहना है ! फिर दुःख,तनाव,अकेलेपन से बचने का क्या कोई उपाय है ? उपाय तो हम सब अपने अपने तरीक़े से करते ही है,निर्भरता एक ऐसा ही उपाय है ! अध्यात्म के पास उपाय से बेहतर समाधान मिलता है क्योंकि अध्यात्म उपाय सुझाने के लिए अकेलेपन को कोई समस्या नहीं मानता !
अध्यात्म कहता है अकेलापन व्यक्ति के अस्तित्व का ही हिस्सा है भले ही
कितना ही पीड़ादायी,भयभित करने वाला क्यों न हो इससे बचने के लियें
कोई उपाय करने नहीं चाहिये ! व्यक्ति को इस सत्य को जैसा है वैसा
स्वीकारना होगा सामना करना होगा ताकि मन एक नई क्रांति से गुज़र
सके जिसे महान मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो सेल्फ़ Actualization
कहते है !

मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

अकेलापन ...!

महान अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो ने एक पिरामिड बनाया जिसको उन्होंने
पहला Self Actualization
दूसरा Esteem needs
तीसरा Social needs
चौथा Safty needs
और पाँचवा Physiological needs
इनको पाँच भागों में बाँटते हुए कहा कि मनुष्य हमेशा नीचे से ऊपर एक चीज़ पाने के बाद दूसरी चीज़ पाने के लियें प्रयत्नशील रहता है और यह तब तक चलता है जब तक उसे संपूर्णता का अहसास नहीं होता ! हम देखते है मनुष्य का जीवन इन पाँच ज़रूरतों के आसपास ही घूमता हुआ !
अकेलापन,रिक्तता,अपूर्णता ये कुछ ऐसे नकारात्मक शब्द है जो मनुष्य के जीवन में भौतिक ज़रूरतों की कमी,सुरक्षा की कमी,आत्मीय रिश्तों की या प्रेम की कमी,आत्मसम्मान की कमी,आत्मसिद्धि या बुद्धत्व की किसी न किसी कमी को दर्शाते है !

क्रमश ....

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

सद्‌गुण

सद्‌गुण एक ऐसा
उत्तम गुण है
जिसे सिखने की
ना ही नक़ल करने की
ज़रूरत पड़ती है !
सद्‌गुण उस ख़ूबसूरत
गुलाब के फूल की
तरह होता है जो
अपनी बंद पंखुड़ियों को
बडे शान से इस
अस्तित्व में खोलता
है !

सोमवार, 20 अगस्त 2018

निर्भार ..

फूल खिलते ही 
सुगंध बहाकर 
ले जा रही थी हवा 
फूल ने मुस्कुराकर कहा ...
आभार,
गंध से मुझे जो
कर दिया निर्भार … !

बुधवार, 12 अप्रैल 2017

सुहाना मौसम है !

ऊंघ रहे क्यों मन
मछुआरे ?
चलो नदी तट पर चले
सुहाना मौसम है !

खूबसूरत शब्दों का
आकर्षक जाल बुने
भावनाओं के आटे से
बनी गोलियां
सुनहरी मछलियों को
खिलायें !


छपाक से डालकर
पानी में जाल
खूब सारी मछलियों को
फंसाये !
चलो नदी तट पर चले
सुहाना मौसम है !


बुधवार, 29 मार्च 2017

कुछ विचार ऐसे भी होते है ...

विचारों की भी अपनी
उम्र होती है !
कुछ विचार जन्म
लेते ही सिकुड़ने
लगते है देर सवेर
मरने के लिए !
कुछ तो जन्म लेने से
पहले गर्भ में ही मर
जाते है !
कभी-कभार कुछ
किसी ब्लॉटिंग पेपर पर
गिरी स्याही के समान
फैलकर देश,समय,
सीमाओं के पार
कालजयी हो जाते है ... !