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आपकी कविता पढ़कर लगा कि संगीत केवल आवाज़ से नहीं, बल्कि आत्मा से भी जन्म लेता है। आपने बहुत सुंदर ढंग से बताया कि एक सच्चा गीत कई कंठों से होकर भी अपनी मूल भावना नहीं खोता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com धन्यवाद!
सुन्दर मनोहारी गीत..
जवाब देंहटाएंसच कहा....वही जो अदृश्य है..पर दृश्य भी.
जवाब देंहटाएंसुन्दर सृजन। विश्व हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 12 जनवरी 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंवही तो गाता है....
जवाब देंहटाएंसुन्दर लगी।
इस रचना को और जरा विस्तार देते तो आनन्द दोगुना हो जाता।।।।
बधाई स्वीकार करें।
सुन्दर गीत..
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बहुत बहुत सुन्दर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत दिन बाद पढ़ा आपको ... कितनी सुन्दर बात ...
जवाब देंहटाएंसोए पड़े तारों को
झनझना कर जगाता है !
हृदय के तारों पर
गीत वही तो गाता है !
यदि संभव हो तो आइये मेरे ब्लॉग पर भी ... आपको याद कर रहा है मेरा ब्लॉग ...
आप मेरे ब्लॉग पर आईं ।बहुत अच्छा लगा । पुराने दिन ताज़ा हो गए । आभार
जवाब देंहटाएंसुन्दर भाव पूर्ण रचना
जवाब देंहटाएंछोटे-सी लेकिन मनोहर कविता। अभिनंदन सुमन जी।
जवाब देंहटाएंFirst You got a great blog. I will be interested in more similar topics. I see you got really very useful topics, I will be always checking your blog thanks.
जवाब देंहटाएंआपकी कविता पढ़कर लगा कि संगीत केवल आवाज़ से नहीं, बल्कि आत्मा से भी जन्म लेता है। आपने बहुत सुंदर ढंग से बताया कि एक सच्चा गीत कई कंठों से होकर भी अपनी मूल भावना नहीं खोता। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
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धन्यवाद!