सोमवार, 3 सितंबर 2012

गिलहरी और उल्लू ! ( लघु कथा )



वे सर्दी के दिन थे !सुबह होने ही वाली थी !सूरज उगने की तैयारी कर रहा था !पंछी अपने-अपने घोंसलों से बाहर निकलने की प्रतीक्षा कर रहे थे !एक पेड़ पर बैठी गिलहरी इधर से उधर, उधर से इधर शाखा पर फुदकते हुये ...मन ही मन सोच रही थी कि, "जैसे ही सुबह होगी सुहानी सुबह का मजा लुंगी, नर्म-नर्म गुनगुनी धूप सेकुंगी "....! इतने में न जाने कहाँ से एक उल्लू उड़कर आ गया और पेड़ पर बैठ गया ! उसने गिलहरी से कहा "सुन ऐ गिलहरी, रात होने ही वाली है ! मैं इस पेड़ पर रात बिताना चाहता हूँ ! तुम्हारा क्या कहना है मेरा इस पेड़ पर विश्राम करना क्या ठीक रहेगा?" उल्लू ने अपनी बंद होती आखों को बड़े मुश्किल से खोलते हुये कहा !
गिलहरी ने कहा ... "निश्चित तुम रह सकते हो ! देखो हम सब कितने प्यार से आराम से यहाँ इस पेड़ पर रहते है तो, तुम क्यों नहीं रह रह सकते हो " उसने पंछियों के घोसलों की ओर इशारा करते हुये कहा ! लेकिन क्षमा करना मित्र, रात नहीं सुबह हो रही है ! देखो सूरज निकलने ही वाला है गिलहरी ने कहा ! उल्लू ने कहा चुप रह गिलहरी, बकवास बंद कर मुझे पता है कि, रात हो रही है देखो तो चारो ओर अंधेरा घिरने लगा है !गिलहरी ने मन ही मन सोंचा.. कौन व्यर्थ के विवाद में पड़े आखिर ये है तो उल्लू ही ना, नाहक झंझट खड़ी कर देगा ! और सुबह की गुनगुनी धुप सेकने का सारा मज़ा चौपट कर देगा ! लेकिन एक बार उसने उल्लू से सत्य  कहना उचित समझा ! सुनो मित्र.... तुम मानो या ना मानो पर एक बात बताना चाहती हूँ कि, तुम्हारा तो रात में दिन होता है, और दिन में रात होती है लेकिन तुम कैसे मानोगे मेरी बात को, तुम्हारी आँखे बंद जो हो रही है, लेकिन तुम्हारे कहने से सत्य नहीं बदलता ! देखो सूरज निकल रहा है !और मै नर्म गुनगुनी धूप का भरपूर मजा लेने जा रही हूँ !

10 टिप्‍पणियां:

  1. अब उल्लू बेचारा क्या समझेगा..
    कोई नहीं उल्लू को माफ कर देना ही बेहतर है

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  2. जब आँख खुले तब सवेरा .....
    :-)

    अच्छी कथा.
    सादर
    अनु

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  3. बहुत सुंदर। मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

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  4. जिसकी जितनी समझ होती है वो उसी अनुसार सीखता है ... अच्छी कहानी है ...

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  5. अच्छी कहानी है .बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  6. उल्लू को कैसे कोई समझाये । सुंदर प्रस्तुति । मेरे ब्लॉग पर आपकी टिप्पणी बहुत अच्छी और प्रेरक है बहुत धन्यवाद सुमन जी ।

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  7. परेशानी का सबब कुछ है तो बस यही कि हर समाज में गिलहरियों को उल्लुओं के साथ रहना पड़ रहा है।

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