शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

सूरज की दादागिरी !

उधर
पानी का स्तर
घट गया !
इधर
पानी को लेकर
झगड़े बढ़ गए
सप्लाई कम हुई !
ऐसे में देखिये
बढ़ गई
सूरज की दादागिरी !
किरण किरण
लिए संग
उलीच उलीच कर
जलाशयों से घर
ले जा रहा है
पानी  ... !

सोमवार, 4 मार्च 2019

बसंत ...!

नियमित समय पर
पिछले वर्ष भी
आया था बसंत
इस वर्ष भी आया है
अगले वर्ष भी आयेगा
इसमें ख़ास बात
 क्या है ?

जो पड़े है अपने ही
खोल में बंद उन अहंकारी
बीजों के लिए नहीं
जो बंद खोल को
सहजता से त्यागकर
मिट्टी में ख़ुद को
गलाते है !
सर्दी,गरमी,तेज़
बारिश को भी
प्रसन्नता से सहकर
अंकुरित होते है
जो आँधी,तूफ़ानों से
निडरता से लड़कर
पल्लवित,पुष्पित हो
हवाओं में अपनी
ख़ुशबू बिखराते है
उन फूलों के लिए ही
हर वर्ष आता है बसंत
यही ख़ास बात है !

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

अहंकार अमरबेल है !

किसी भी वृक्ष पर
फैली हुई अमरबेल
धीरे-धीरे उस वृक्ष का
सारा रस चूसकर
उसके जीवन को ही
लील लेती है !
दूर-दूर तक फैला
मैं मैं करनेवाला
हमारा अहंकार
अमरबेल ही तो है
जिसमें कोई जड़
नहीं दिखती !
उपरसे हरा भरा
भीतरसे रुखा सूखा
जीवन दिखता है
पर !

गुरुवार, 3 जनवरी 2019

गतांक से आगे ....

किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा है “बड़े अजीब से इस इस दुनिया के मेले है
यूँ तो दिखती भीड़ है लेकिन फिर भी सब अकेले है” !

बोधि वृक्ष के नीचे बैठे बुद्ध हमें अकेले दिखाई देते है लेकिन उनका अकेलापन हमारी तरह नहीं अपने आप में संपूर्ण है ! कहीं पढ़ा है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर अपने सृजन में इतने अधिक डूब जाते थे कि चार-चार दिन तक अपने कमरे से बाहर नहीं निकलते थे उन्हें समय का बोध ही नहीं होता था ! उनका अकेलापन नकारात्मक नहीं सृजनात्मक है ! लेकिन हमारा अकेलापन बिलकुल उस शायर के कहे अनुसार है ! मन का ख़ालीपन जीवन की किसी कमी को दर्शाता है ! शायद यही कमी,यही अकेलापन हमें जीवन में भौतिक विकास के मार्ग पर भी ले जाता है ! किंतु भौतिक पृष्ठभूमि पर किया गया बाह्य विकास फिर से दुःख,तनाव,अकेलेपन के मार्ग पर ही बढते रहना वर्तुल पर घूमते रहना है !
फिर दुःख,तनाव,अकेलेपन से बचने का क्या कोई उपाय है ? उपाय तो हम सब अपने अपने तरीक़े से करते ही है,निर्भरता एक ऐसा ही उपाय है ! अध्यात्म के पास उपाय से बेहतर समाधान मिलता है क्योंकि अध्यात्म उपाय सुझाने के लिए अकेलेपन को कोई समस्या नहीं मानता ! अध्यात्म कहता है अकेलापन व्यक्ति के अस्तित्व का ही हिस्सा है भले ही
कितना ही पीड़ादायी,भयभित करने वाला क्यों न हो इससे बचने के लियें कोई उपाय करने नहीं चाहिये !
व्यक्ति को इस सत्य को जैसा है वैसा स्वीकारना होगा सामना करना होगा ताकि मन एक नई क्रांति से गुज़र सके,उसिको महान मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो Self Actualization  कहते है !

मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

अकेलापन ...!

महान अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो ने एक पिरामिड बनाया जिसको उन्होंने
पहला Self Actualization
दूसरा Esteem needs
तीसरा Social needs
चौथा Safty needs
और पाँचवा Physiological needs
इनको पाँच भागों में बाँटते हुए कहा कि मनुष्य हमेशा नीचे से ऊपर एक चीज़ पाने के बाद दूसरी चीज़ पाने के लियें प्रयत्नशील रहता है और यह तब तक चलता है जब तक उसे संपूर्णता का अहसास नहीं होता ! हम देखते है मनुष्य का जीवन इन पाँच ज़रूरतों के आसपास ही घूमता हुआ !
अकेलापन,रिक्तता,अपूर्णता ये कुछ ऐसे नकारात्मक शब्द है जो मनुष्य के जीवन में भौतिक ज़रूरतों की कमी,सुरक्षा की कमी,आत्मीय रिश्तों की या प्रेम की कमी,आत्मसम्मान की कमी,आत्मसिद्धि या बुद्धत्व की किसी न किसी कमी को दर्शाते है !

क्रमश ....

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2018

सद्‌गुण

सद्‌गुण एक ऐसा
उत्तम गुण है
जिसे सिखने की
ना ही नक़ल करने की
ज़रूरत पड़ती है !
सद्‌गुण उस ख़ूबसूरत
गुलाब के फूल की
तरह होता है जो
अपनी बंद पंखुड़ियों को
बडे शान से इस
अस्तित्व में खोलता
है !

सोमवार, 20 अगस्त 2018

निर्भार ..

फूल खिलते ही 
सुगंध बहाकर 
ले जा रही थी हवा 
फूल ने मुस्कुराकर कहा ...
आभार,
गंध से मुझे जो
कर दिया निर्भार … !