शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2020

थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !

बुढ़ापे को रिवर्स तो 
नहीं किया जा सकता 
पर हाँ 
चिड़चिड़े,सनकी,खूसट 
बुढा/बूढ़ी होने से 
खुद को 
बचाया जा सकता है 
थोड़े कलात्मक उपाय 
करके !
थोड़ा योग,प्रयोगी हो जाओ !
थोड़ा ध्यान,प्रेममय हो जाओ !
थोड़ा गीत,संगीतमय हो जाओ !
थोड़ा काव्यसे,रसमय हो जाओ !
सुख दुःख की बरसों की जमीं
गाठों को पिघलाकर 
थोड़ा छू लेने दो प्रभु को !

13 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (३१-१०-२०२०) को 'शरद पूर्णिमा' (चर्चा अंक- ३८७१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 01 नवंबर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. वाह क्या बात है थोड़ा छू लेने दो प्रभु को।
    सुंदर।
    सार्थक।

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  8. आदरणीया मैम,
    बहुत ही सुंदर कविता जीवन के आखिरी पड़ाव को जीने के विषय पर। आज कल सभी लोग "ग्रेसफुल एजिंग " की बात कर रहे हैं और इसके ऊपर बड़े बड़े फंडे पढ़ने सुनने में आ रहे हैं। क्यूंकि मैं खुद मनोविज्ञान की छात्रा हूँ सो इस का भी ज़िक्र है समाजिक मनोविज्ञान की पुस्तक में।
    आपने सभी कुछ इतनी सरलता और सहजता से कह दिया जिसे कहने के लिए और करना सिखाने के लिए लोग आज कल बड़े बड़े हेल्प ग्रुप्स और न जाने क्या क्या उपाय कर रहे हैं। सुंदर व आनंदकर रचना के लिए हृदय से आभार। मैं ने अपनी नानी को भी पढ़ कर सुनाया, उन्हें भी बहुत अच्छी लगी।

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  9. प्रिय Ananta Sinha,
    आप मनोविज्ञान की छात्रा है पढ़कर बहुत अच्छा लगा फिर तो आप जानती ही होंगी कि
    मनुष्य की अधिकांश बीमारियों का मूल कारण उसका अपना मन होता है न कि बुढ़ापा !
    इस मन का विश्लेषण करना ऐसे ही है जैसे एक छड़ी लेकर कूड़े के ढेर को टटोलना !
    होगा क्या ? कूड़े की बदबू चारों ओर फैल जाएगी और साँस लेना भी जीना मुश्किल हो जाएगा !
    फिर उपाय क्या है ?
    इसके लिए रचना में जो कलात्मक उपाय बताये है एक ग्रेसफुल बुढ़ापे के लिए अनुभूति आधारित है
    न कि जानकारी आधारित ! इस सार्थक,सुंदर टिप्पणी के लिए हृदय से आभारी हूँ आपकी !

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