गुरुवार, 13 सितंबर 2012

अपने आचरण की फिक्र करना .....( ताओवाद )


चीन की बहुत बड़ी दार्शनिक परंपरा है जिसका नाम है ताओवाद ! ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में ताओ दर्शन प्रौढ़ हुआ, और तभी से ताओ ग्रन्थ में ली तजु नामक दार्शनिक का उल्लेख आता है !
ताओ का मतलब होता है मार्ग या फिर यूँ कहे कि, वह नियम जिससे अस्तित्व क़ी हर चीज संचालित होती है ! ताओवाद लोगों को रहस्यपूर्ण, हास्यपूर्ण छोटी छोटी कहानियों द्वारा मार्ग दर्शन करता है !छोटी-छोटी कहानिया पर अर्थ बड़े गंभीर और अर्थपूर्ण होते है !
एक नमूना पेश है ...."कुआन मिन ने ली तजु से कहा , "यदि तुम्हारे शब्द सुंदर या असुंदर है तो वैसी ही उसकी प्रतिध्वनि होगी ! यदि तुम्हारी आकृति छोटी या लंबी हो तो वैसी ही उसकी छाया होगी !शोहरत प्रतिध्वनि है, आचरण छाया है ! इसलिए कहते है, अपने शब्दों के प्रति सावधान रहना क्योंकि कोई न कोई उनसे सहमत होगा ! अपने आचरण की फिक्र करना कोई न कोई उसकी नक़ल करेगा" ! ताओ दर्शन में इस प्रकार की छोटी-छोटी कहानियाँ वह सब कह देती है जो बड़े बड़े दर्शन शास्त्र नहीं कह पाते !

अभिव्यक्ति की आजादी की हम सब बात करते है ! युवा कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी इन दिनों अपने विवादास्पद कार्टूनों के लिए देशद्रोह के विवादों में घिरा है ! आजादी परम संवेदनशीलता है इसका हम किस प्रकार उपयोग करते है यह हमारे  attitude पर निर्भर करता है !

आवश्यक सुचना;- बेहतरीन कवि,कथाकार,समीक्षक हमारे ब्लॉग परिवार के जानेमाने वरिष्ठ सदस्य 
"कलम" ब्लॉग के ब्लॉगर श्री चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी नहीं रहे ! आपका स्नेह कभी भूल नहीं पाऊँगी भाई जी, इश्वर आपकी आत्मा को शांति दे, अश्रुपूरित नेत्रों से भाव भीनी श्रद्धांजलि समर्पित करती हूँ !

5 टिप्‍पणियां:

  1. सही है सुमन जी और असीम जी के कार्टून उनकी मानसिक अपरिपक्वता दर्शाते है अपनी बात कहने के शिष्ट तरीके भी हैं ऐसी अशिष्टता निंदनीय है. .. .औलाद की कुर्बानियां न यूँ दी गयी होती .

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  2. सोच समझ कर अभिव्यक्ति होनी चाहिए ...सही है

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  3. सटीक लेख .....

    श्री चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जी जी की आत्मा को शांति मिले .... विनम्र श्रद्धांजलि

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  4. यह बात आचरण के दिखावे की ओर भी संकेत करती है। नकल करने वालों को नक्कालों से भी सावधान रहना चाहिए।

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