शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

अनहद नाद एक .....


हम सब फूल है 
इस उपवन के 
फूल न्यारे, ख़ुशबू न्यारी 
क्या जूही, क्या चमेली 
क्या गुलाब पीला,लाल 
रंगबिरंगी इन फूलों से 
मिलकर ही तो सजती है 
पूजा की थाल !
शब्द अलग, भाव अलग 
क्या गीत, क्या कविता,लेख 
विविध गीतों से मिलकर ही तो 
बनता है अनहद नाद एक !
अपनी-अपनी धारणाओं की 
हद में मत बांधो इनको 
सबको अपना-अपना 
सृजन गीत मुक्त कंठ से 
गाने दो सबको क्यों के ....
बेरंग,बेमजा हो जाता है 
उपवन का सौन्दर्य 
एक रंग में,एक रूप में,
एक गीत में, एक ही 
 भाव में .....

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना.....
    भावनाओं और अभिव्यक्ति स्वच्छंद हो तभी सुंदरता निखर कर आती है......

    सादर
    अनु

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  2. संकुचित सोंच के साथ उन्मुक्त होकर जीना कठिन हो जता है ...
    बधाई अच्छी रचना के लिए !

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  3. बहुत सुंदर सोच और प्रवाहमयी भाषा..

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  4. बहुत सही कहा है ... अनेक में एकता होनी चाहिए

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  5. शब्द अलग, भाव अलग
    क्या गीत, क्या कविता,लेख
    विविध गीतों से मिलकर ही तो
    बनता है अनहद नाद एक ..

    सच कहा है ... यही हमारे समाज हमारे देश का भी एक रूप है ...
    सुन्दर रचना ...

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  6. रंगबिरंगी इन फूलों से
    मिलकर ही तो सजती है
    पूजा की थाल !
    sarthak kathan
    bahut sundar rachna ..

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  7. बड़ी प्यारी बात। सफलता और ऊंचाई के पैमाने बदल जाने के कारण आज हममें से बिरले ही कोई वह है जो हो सकता था। अनंत संभावनाओं के दमन का नतीज़ा ही है आज की दुनिया।

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  8. सहज सरल भाषा में समझाया एक गहरा जीवन दर्शन ..... बहुत ही सुंदर

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  9. @ सुमन जी ! कविता अच्छी है लेकिन अनहद नाद विविध गीतों से मिलकर नहीं बनता.
    आप चाहें तो खुद सुन कर देख लीजिये.
    आसन है.

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    1. DR. ANWER जमाल जी,
      नेटवर्क न होने की वजह से आपकी टिप्पणी देर से पढ़ रही हूँ !
      भाषा की दृष्टी से आप बिलकुल सही कह रहे है !विविध गितोंको एक साथ सुनते है तो
      केवल एक कोलाहल के सिवा कुछ सुनाई नहीं देता ! लेकिन कविता की यही तो विशेषता होती है एक लफ्ज पर, सदा करने के सौ अंदाज
      होते है !आप ऐसे भी पढ़ सकते है अनहद नाद से ही विविध गीत बनते है !
      आभार टिप्पणी के लिये !

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  10. खूब सूरत पंक्तियों के लिए बधाई

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  11. जीवन के मूल्यों को सझने के लिए सरल तथा व्यावहारिक दृष्टिकोण ,बधाई सार्थक रचना हेतु |

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