शनिवार, 5 जनवरी 2013

भूख की बीमारी ....( लघु कथा )


एक युवक अक्सर बीमार रहता, बीमारी ही कुछ ऐसी थी ! भूख की बीमारी ! उसे दिन रात भूख ही भूख लगती ...वैसे देखा जाय तो, बीमारी भी कुछ खास नहीं थी ! भूख तो प्राकृतिक थी दरअसल उसने भोजन के विरोध में बहुत सारी बाते गलत सलत सुन ली थी ! किताबों में पढ़ लिया था कि, उपवास करना पूण्य है ! जितना वह भोजन के बारे में सोचता भूख उतनी ही तीव्र होती ! जीतनी भूख को दबाने की कोशिश करता भूख उतनी ही परेशान करने लगती ! बड़ी मुश्किल में पड़ गया था वह कभी कभी लगातार खाते ही रहता तो कभी उपवास करता कई दिनों तक ! जब ज्यादा खा लेता तो पश्चात्ताप करता क्योंकि ज्यादा भोजन करने की तकलीफ झेलनी पड़ती उसे  चौबीस घंटे भोजन के बारे में सोच सोच कर विक्षिप्त सा हो गया था वह ! आखिर घरवाले  भी उसके इस बीमारी से परेशान हो गए थे ! उसका शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य दिन ब दिन गिरता ही जा रहा था ! घरवालों ने आखिर उसे डाक्टर को दिखाया ! डाक्टर ने जाँच पड़ताल कर कहा कि, घबराने की कोई बात नहीं यह कोई खास बीमारी नहीं जिसका इलाज संभव न हो, किसी अच्छे हिल स्टेशन पर चले जाओ हवा पानी के बदलाव से तुम जल्द ही ठीक हो जाओगे डाक्टर ने कहा !

सलाह के अनुसार वह एक पहाड़ पर गया वहां हिल स्टेशन के एक कमरे में रहने लगा ! एक दिन उसकी पत्नी ने सोचा कि, शायद उसका पति हिल स्टेशन पर जाकर भोजन की बीमारी से मुक्त हो गया होगा, उसने ख़ुशी-ख़ुशी बहुत सारे फूल उस पहाड़ पर भिजवाये और साथ में एक पत्र लिखा कि, मै बहुत खुश हूँ और उम्मीद करती हूँ कि, तुम बहुत जल्द वहां से स्वस्थ होकर लौटोगे ! मेरी शुभकामनायें तुम्हारे साथ है ! यह सुन्दर फूल भेज रही हूँ तुम्हारे लिए प्रेम सहित !

दुसरे दिन पत्नी के सेल फोन पर उसका मैसेज था ...लिखा था .."मेनी-मेनी थैंक्स फॉर दी लवली फ्लावर्स, दे आर सो डिलीशियस " !

10 टिप्‍पणियां:

  1. यह इलाज़ तो काफी मनोरंजक भी रहा. सुंदर कथा.

    नव वर्ष की आपको शुभकामनायें.

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  2. bikul sahmat hoon suman ji yahi hota hai .....shandar prastuti ke liye aabhar .

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  3. "मेनी-मेनी थैंक्स फॉर दी लवली फ्लावर्स, दे आर सो डिलीशियस "

    recent post: वह सुनयना थी,

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  4. मेनी-मेनी थैंक्स फॉर दी लवली फ्लावर्स, दे आर सो डिलीशियस " !

    पोस्ट के आखिर तक उपरोक्त पत्र पढकर पहले तो हंसी छूट गई...पर बहुत उपयोगी कहानी है.

    पर सही बात यही है कि जिस चीज के जितना पीछे पडेंगे वह उतना ही सतायेंगे, जिस दिन इस कहानी का नायक भूख के बारे में सोचना छोड देगा, इसको निजात मिल जायेगी.

    रामराम.

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  5. मेनी-मेनी थैंक्स फॉर दी स्टोरी, रियली डेलिशियस ...

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  6. सच के पास है ये कहानी ... जितना पीछे भागो उतना ही पीछे आती हैं ऐसी चीज़ें ...
    मस्स्त कहानी ...

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