शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

बदलाव ....

आश्रम में तोड़ फोड़ 
शिविर में लगाई आग 
विरोध के दौरान 
थोडा धैर्य रखिए 
हो रहा बदलाव ...!

        ***
तब उस विंडो के सामने 
खड़े रहने की थी मनाई 
अब इस विंडो के सामने 
दिन-रात बैठने आजादी 
क्या यह बदलाव नहीं ...?

10 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया,
    ये संदेश सही लोगों तक पहुंच जानी चाहिए

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सटीक बात कही आपने.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बदलाव तो है ... पर दिशा अभी तक पूरी तरह से तय नहीं है इस बदलाव की ..
    भावमय प्रस्तुति है ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. निसंदेह यदि आकंक्षा है तो बदलाव हो कर रहेगा.

    शुभकामनायें पोंगल, मकर संक्रांति और माघ बिहू की.

    उत्तर देंहटाएं
  5. भारत को आज़ादी मिली रातमे पर अबतक सवेरा नहीं हुआ। बदलाव जरुरी है। बहुत खूब।

    उत्तर देंहटाएं
  6. तब उस विंडो के सामने
    खड़े रहने की थी मनाई
    अब इस विंडो के सामने
    दिन-रात बैठने आजादी
    क्या यह बदलाव नहीं ...?


    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ . सुंदर प्रस्तुति
    वाह .बहुत सुन्दर

    उत्तर देंहटाएं
  7. ऐसे गुरु रहे तो फिर विद्रोह देखिये
    कुछ इंतज़ार कीजिये,बदलाव देखिये

    उत्तर देंहटाएं