मंगलवार, 26 अप्रैल 2011

प्रेम क्या है ?

चारोओर प्रेमपर मचा बवाल ! फिर भी,प्रेम शब्दोंमे व्यक्त नहीं हो पाया ! क्या है प्रेम ? कैसा है प्रेम क्या है उसकी परिभाषा? अरे! प्रेम कही वो तो नहीं? जिसने कल रात अपनी पत्नी को शक के आधार पर जिन्दा जला दिया था ! दस साल का प्रेम का गठबंधन पल भर मे तोड़ दिया था ! प्रेम कही वो तो नहीं ? जिसने अपनी ही क्लासमेट लड़की से प्यार किया था ! जब की प्यार एकतरफा था, लड़कीने प्रेम से इनकार किया तो,लडकेने असिड्से (acid) हमला कर उसके सुंदर चहरे को झुलसा दिया था ! बेचारी लड़की उपचार में अगर ठीक भी हो गई तो, अपने चहरे को रोज दर्पण में देख कर पल-पल मरा करेगी !  प्रेम के नाम से जिंदगीभर नफरत करेगी ! शायद प्रेम कही खो गया लगता है ! और हमारा मन कस्तूरी मृग बनकर उसको तलाश रहा है जंगलों, पहाडोंमे लहूलुहान -सा  होकर, अपने ही अस्तित्व को अपनेही हाथों घायल ! कही प्रेम ये तो नहीं ......जिसके नाम मात्र से छाने लगती है खुमारी सुनाई देने लगते  है मंदिर की, घंटियोंकी आवाजे!  गूंजने लगते है कानोंमे पवित्र अजान के स्वर ! तब हम धरती से कई ऊपर किसी दिव्य लोक में पहुँच जाते है ! तब प्रेम प्रार्थना बन जाता है ! प्रिय के प्रति समर्पण बन जाता है प्रेम ! तन चन्दन मन धूप बन जाता है प्रेम ! कही हमारी ही नाभी से उठ रही कस्तूरी सुगंध तो नहीं प्रेम ?           

15 टिप्‍पणियां:

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  2. प्रेम चाहे अध्यात्मिक हो अथवा मानवीय, इसको केवल अनुभव किया जा सकता है ...मानवीय अनुभूतियों के बारे में मेरी एक रचना पढ़ें ...
    http://satish-saxena.blogspot.com/2011/01/ii.html

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  3. सतीश जी,
    मानवीय प्रेम अध्यात्मिक प्रेम में बस थोडासा ही अंतर है !
    फूल और सुगंध जितना ........

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  4. आजकल तो प्रेम का विकृत रूप ज्यदा दिखाई देता है....खासकर युवा वर्ग में...... सुंदर पोस्ट

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  5. बहुत सुन्दर आलेख .... प्रेम एक अहसास है जो दिखता नहीं महसूस करना होता है ....

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  6. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति .. संक्षेप में लेकिन पूर्ण

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  7. सुन्दर शब्द और भाव से सजी पोस्ट .

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  8. कही हमारी ही नाभी से उठ रही कस्तूरी सुगंध तो नहीं प्रेम ?............Beautiful expression Suman ji.

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  9. प्रेम तो समर्पण ही है । अपने प्रिय को दुख दे वह कैसा प्रेम । सुंदर रचना ।

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  10. बहुत सुन्दर आलेख .... प्रेम एक अहसास है जो दिखता नहीं महसूस करना होता है ...

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  11. प्रेम
    इक प्रार्थना है
    इक समर्पण है
    इक अनिभव है
    और
    निर्मल , शुद्ध , निश्छल
    विचारों का प्रकटीकरण भी प्रेम ही है .

    अभिवादन स्वीकारें .

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  12. कृपया
    ऊपर ...
    "अनिभव" को "अनुभव" पढ़ें .
    (टंकण त्रुटि )

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  13. अच्छू पोस्ट....अहसास हैं यह तो!!

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  14. आप की बहुत अच्छी प्रस्तुति. के लिए आपका बहुत बहुत आभार आपको ......... अनेकानेक शुभकामनायें.
    मेरे ब्लॉग पर आने एवं अपना बहुमूल्य कमेन्ट देने के लिए धन्यवाद , ऐसे ही आशीर्वाद देते रहें
    दिनेश पारीक
    http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/
    http://vangaydinesh.blogspot.com/2011/04/blog-post_26.html

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