सोमवार, 12 अगस्त 2013

ऐलिस इन वंडरलैंड ….

 ऐलिस भाग रही थी परियों के देश जाने के लिए ! जहाँ कल्पवृक्ष होगा, खाने को बहुत सारे पकवान,मिठाइयाँ,बहुत से प्रकार के फल जो कभी उसने सपने में भी देखे नहीं थे,मीठे पानी के झरने आहा स्वर्ग सा आनंद क्या कुछ नहीं मिलेगा वहां ? वह भागती गई भागती गई आखिर परियों के देश पहुच गई  … उसने देखा दूर कल्पवृक्ष की छाया में परियों की रानी खड़ी मुस्कुरा रही है और उसे पास आने के लिए इशारा कर रही है ! उसने अपने आस पास देखा कितना सुन्दर है परियों का देश बिलकुल मेरे देश से अलग,वह सब है यहाँ जिसकी उसने कभी कल्पना की थी ! इसीलिए तो जमीन से स्वर्ग तक आने के लिए बड़े प्रयास किये है ! सूरज उग रहा था वह परियों की रानी की दिशा में भागने लगी, सुबह से दोपहर हो गई भागते-भागते उसने खड़े होकर देखा अभी भी रानी और उसके बीच में उतने का उतना ही फासला है !भूखी प्यासी ऐलिस थक गई थी उसने जोर जोर से चिल्लाकर रानी परी से कहा "मै थक गई हूँ भागते-भागते लेकिन अभी तक तुम तक पहुँच नहीं पायी क्या बात है रानी परी "? 

रानी परी ने कहा,सोचो मत, जो सोचता है फिर वह दौड़ नहीं पाता इसलिए सोच म़त बस दौड़ती चलो घबराओ मत, दौड़ो जरुर पहुँच जाओगी ! ऐलिस फिर से दौड़ने लगी सूरज ढलने लगा साँझ से रात होने लगी दौड़ते-दौड़ते उसने फिर चिल्लाकर पूछा रानी परी से "रानी परी यह कैसी समस्या है दौड़ते दौड़ते थक गई हूँ अब तो साँझ से रात भी होने लगी है फिर भी तेरे मेरे बीच फासला ज्यों का त्यों बना हुआ है ! रास्ता अभी भी उतने का उतना ही पार करना है !यह मामला क्या है ? यह कैसी तुम्हारी दुनिया है जहाँ कितना ही कोई दौड़े रास्ता कभी ख़तम ही नहीं होता ? रानी परी ऐलिस की बाते सुनकर हंसने लगी, उसने कहा पागल लड़की किसी भी दुनिया में कोई कितना भी दौड़े कहीं नहीं पहुंचता ! कोई भी रास्ता कभी पूरा नहीं होता, जो भी पाना था  उसके पीछे दौड़ते दौड़ते एक दिन खड़े होकर देखोगी तो फासला उतना ही रहेगा जहाँ से शुरू किया था !

आज मै भी इस वंडरलैंड की ऐलिस बन गई हूँ ! शब्दों के पीछे दौड़ते दौड़ते थकान सी महसूस होने लगी है ! रुकने का मतलब है फिर से कोई तनाव पाल लेना ! दौड़ने का मतलब है बहुत सारा तनाव पाल लेना ! तय नहीं कर पा रहीं हूँ कि क्या करू ? यह कैसी दुनिया है फंतासियों की ? यह कैसा शब्दों का जादुई सम्मोहन है जिससे दूर रहा नहीं जाता !क्या जिंदगी के बासीपन से दूर रखने के लिए हमेशा इसी प्रकार से खुद को गतिमान रखे ? नकारात्मक उर्जा के पनपने के डर से,साफ सुथरे विचारों की अभिव्यक्ति कर ,सकारात्मक उर्जा स्त्रोत से जुड़े रहे ? क्या करे, कोई समाधान है ? क्या  इस ऐलिस के लिए इस वंडरलैंड के किसी रानी परी के पास इन सब प्रश्नों का कोई सटीक जवाब है   …. ??




12 टिप्‍पणियां:

  1. नहीं ...
    नकारात्मक विचार ग्रहण योग्य नहीं होते !आशा जीवन दीप है , उसे बुझना नहीं चाहिए !
    बशर्ते धोखे का पीछा न किया जा रहा हो !

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  2. जी बिलकुल ठीक लिखा ....खुद को गतिमान रखना ज़रूरी है ...तभी तो सद्गति मिलेगी और हम दुर्गति से बचेंगे ....!!

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  3. उसने कहा पागल लड़की किसी भी दुनिया में कोई कितना भी दौड़े कहीं नहीं पहुंचता ! कोई भी रास्ता कभी पूरा नहीं होता, जो भी पाना था उसके पीछे दौड़ते दौड़ते एक दिन खड़े होकर देखोगी तो फासला उतना ही रहेगा जहाँ से शुरू किया था !

    जीवन का सारांश यही है. बहुत ही विचारणीय आलेख.

    रामराम.

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  4. नकारात्मक उर्जा के पनपने के डर से,साफ सुथरे विचारों की अभिव्यक्ति कर ,सकारात्मक उर्जा स्त्रोत से जुड़े रहे ?

    इस शरीर में रहते हुये इससे भागना नामुमकिन सा ही है, बेहतर है हम सकारात्मक ऊर्जा का संग्रहण करते चले तो जीवन सरल हो जायेगा.

    रामराम.

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  5. बिल्कुल सही है गतिमान रहना जरुरी है पॉजिटिव सोच के साथ ही आगे बढना है ....

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  6. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (14 -08-2013) के चर्चा मंच -1337 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  7. सकारात्मक गतिशीलता आवश्यक है ....... आपका ये द्वंद्व कई बार खुद भी महसूस किया है ....

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  8. सकारात्मक गति से चलते रहना ... और उस पगली जैसे भोले ही रहना जीवन का सार है ... आशा का दामन साथ होना चाहिए ...

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  9. मैं इसके जवाब में अपनी एक ग़ज़ल दे रहा हूँ...

    जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ।
    मैं तो केवल इतना सोचूँ।

    बालिग होकर ये मुश्किल है,
    आओ खुद को बच्चा सोचूँ।

    सोच रहे हैं सब पैसों की,
    लेकिन मैं तो दिल का सोचूँ।

    बातों की तलवार चलाए,
    कैसे उसको अपना सोचूँ।

    ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
    मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।

    जो भी होगा अच्छा होगा,
    मैं बस क्या है करना सोचूँ।

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  10. अक्सर हमें लगता है कि हम चलते चलते बहुत दूर आ गए पर कुछ मिला नहीं
    सब शून्य ....
    पर उस शून्यता के भीतर बहुत कुछ परिपूर्ण होता है
    ठहराव से बढ़िया सही सोच के साथ सदा गतिमान रहना है

    सादर!

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. बिल्कुल ... गतिशीलता ही जीवन है स्थिरता तो मृत्यु को इंगित करती है ..

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