रविवार, 15 अप्रैल 2012

हाईटेक हुए है बाबाजी ........


ऐसा कोई दिन नहीं है 
ऐसी कोई रात नहीं 
जहाँ नित नये क़िस्से
दिलचस्प घटनायें 
न हो ऐसा कोई 
शहर नहीं है 
साधु-संत ज्ञानी 
आजकल हर टी. वी.
चैनलों पर छाये है 
हाईटेक हुए है बाबाजी !
ये है सब सत्ता के उपासक 
कनक कामिनी के पुजारी !
इनका काम है पाखंड 
रचाकर छलना मासूमों को 
इनके नाम अनेक पर
 लक्ष्य सबका एक 
सत्ता, रुपया, शासन !
सुनो कुछ गुणों तो 
क्या कहता है 
शास्त्र  पुरान
कण-कण में भगवान 
फिर इनका है क्या काम !
आजकल दुनिया में 
यही तो हो रहा है 
उनमे इनमे कोई 
भेद नहीं है 
एक जैसी कूटनीति 
एक जैसा व्यापार 
फल-फूल रहा है 
जरा ध्यान से देखिये 
बड़ा सूक्ष्म भेद है 
दोनों में 
वे करते है देश के नाम 
ये करते है भगवान के !


17 टिप्‍पणियां:

  1. इनके नाम अनेक पर
    लक्ष्य सबका एक
    सत्ता, रुपया, शासन !

    बिलकुल सही कहा आपने .....लोगों के स्वभावों और भावनाओं ..दोनों का शोषण करना ही इनका उद्देश्य है .....

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  2. हम भी बाबा बनाने की सोंच रहे हैं ...
    हमारे उस्ताद होंगे श्री श्री १०००८ अली सय्यद फकीर ...
    आइये और कमाइए ...

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    1. हा ....हा .हा .....मजेदार टिप्पणी है !
      वैसे हमारे भी उस्ताद है जी ....... वे इन पाखंडी बाबाओं के तंत्र,मंत्र जाल से जागरूक करते है !
      और उनका नाम है ओशो ! बहुत आभार सतीश जी !

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  3. ......................कमज़ोर वक्त में लाठी खोजते हैं लोग........
    और मानो तो भगवान.....ना मानों तो पत्थर....................
    आस्था है अपनी अपनी.................

    सार्थक लेखन सुमन जी.

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  4. सार्थक रचना ....
    कौन समझाए जनता को ...?

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  5. यही तो हो रहा है
    उनमे इनमे कोई .....har jagah gaurakhdhandha .....kis..kis ko samjhayen kaise khud ko bachayen...

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  6. जी आपके सामने मुझे आलू की टिक्की क्यों दिखाई दे रही है ?
    बाबा जी मैने कल ही टिक्की खाई थी..
    अच्छा! ये बताइये कि आपने टिक्की हरी चटनी से खाई या लाल चटनी से ?
    बाबा मुझे हरी चटनी अच्छी लगती है..
    ओह बस यही गलती की आपने.. जाओ आज लाल चटनी से टिक्की खुद भी खाना और अपने पांच ऐसे दोस्तों को भी खिलाना जिन्होंने हरी टीशर्ट पहनी हो..

    कृपा आनी शुरू हो जाएगी, कैसा भी लिखो सौ से ज्यादा कमेंट मिलेंगे।

    हाहहाहाहहा.. बहुत सुंदर..

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    1. महेंद्र जी,...लगता है मुझ पर बाबा जी कृपा हो गई,बस एक कमेन्ट आपका और एक सुमन जी, का आ जाय तो बस १०० कमेंट्स हो जाएगे,बस लाल चटनी के साथ टिक्की खाउगां और ५ हरे शर्ट वाले दोस्तों को खिलाउगा,...शायद बाबा जी की कृपा से २००
      कमेंट्स आ जाए,...

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  7. जब तक हम लोग बाबाओं के अंधविस्वास को मानते रहेगे,तब तक बाबाओं की चांदी ही चांदी रहेगी,चाहे वे निर्मल बाबा हो या कोई भी बाबा,सबका काम है सिर्फ बेवकूफ बनाकर पैसा कमाना,...

    बहुत सुंदर सार्थक सटीक बाबाओं की पोल खोलती रचना...बेहतरीन पोस्ट के लिए ,,सुमन जी बधाई ...

    मेरे पोस्ट पर आइये आपका स्वागत है,....
    .
    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

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  8. बाबाओं से बच कर रहना हमें अभी सीखना है!..संजोग से मेरी पोस्ट पर भी बाबाओं का ही जिक्र है! लिंक देखिएँ

    http://arunakapoor.blogspot.in/2012/04/blog-post_16.html

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  9. हे भगवान
    कृपा कर उनपे
    मिले छुट्टी!

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  10. हर तरफ़ लूट मची है, व्यापार का बाज़ार गर्म है। पतन ही पतन है।

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  11. एक जैसा व्यापार
    फल-फूल रहा है
    जरा ध्यान से देखिये
    बड़ा सूक्ष्म भेद है
    दोनों में
    वे करते है देश के नाम
    ये करते है भगवान के !

    Ji Han... Sateek Panktiyan

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  12. सब तन्त्र माया का है, या माया का ही तन्त्र है।
    यह हमारा दिया हुआ नहीं, बाबा का ही मन्त्र है।

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