शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

छलक-छलक आते है ये आँसू......


                           छलक-छलक आते है ये आँसू 
                           बिन बादल बरस जाते है ये आँसू 
                           इन बहते आँसुओं को मत रोको 
                           इन्हें बहने दो !
                           इन आँसुओं के खारेपन में 
                           जीवन के अनंत दुःख धुल जाने दो !

कभी पूर्व दिशा में उगते सूरज को देख कर, कभी पश्चिम दिशा में अस्त होते सूरज को देख कर, कभी कल-कल बहते झरनों,पहाड़ों को देख कर, कभी  आकाश में बगुलों की उडती पंक्तियों को देख कर तो कभी चाँद तारों को देख कर अनायास हमारे आँसू छलक जाते है ! जिसका कोई कारण नहीं होता ! ज्यादातर ख़ुशी और गम में बहने वाले आँसुओं के बारे में ही हमें पता है ! पर कभी-कभी ऐसा भी होता है आँसू स्वयं छलक जाते है आंखोका कोई दोष नहीं होता ! रोने से मतलब हम सब हमारा अपने आपसे नियंत्रण खोने के रूप में परिभाषित करते है ! कोई रोता है तो हम उसे समझाने जाते है क़ि, क्यों रो रहे हो रोना अच्छी बात नहीं है ! रोने क़ी स्वीकृति किसीको भी नहीं है ! फिर भी स्त्रियों का रोना समाज को स्वीकार्य है लेकिन पुरुषों को तो बिलकुल नहीं ! अगर कोई पुरुष भावना में बहकर रोता भी है तो, बड़ा शर्मिंदगी महसूस करता है ! हंसना स्वास्थ्य के लिये जितना जरुरी है रोना उतना ही जरुरी है ! जब हम हमारी स्वभाविक भावनाओं को दबाते है तो, अनजाने ही नकारात्मक उर्जा का जहर इकठ्ठा करते जा रहे है ! रोना कैसे स्वास्थ्य वर्धक है आइये जानते है वैज्ञानिक क्या कहते है !
वैज्ञानिक का कहना है क़ि सुबक सुबक कर रोना साधारण रोने से कई ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक है  क्योंकि हम रोने को मुंह,गले,सीने और पेट की मांसपेशियों द्वारा रोकते है ! सुबक सुबक के रोने से मांसपेशियों में निहित तनाव विसर्जित होता है और इसके पश्चात आप मनों-शरीर में एक गहन शांति का अनुभव करते है ! डाक्टर लोवेंन के अनुसार सायनस और ह्रदय की समस्याएं न रोने से होती है ! इनके अनुसार जो पुरुष सहज रूप से रोते है वे लंबा जीते है ! रोना आँखों के तनाव को भी दूर करता है ! रोना भावों का बर्फ के समान पिघलने जैसा है ! जापान में तो आँसुओं की महिमा को जानकर ऐसे क्लब निर्माण किये गए है, जहाँ रोने -धोने वाली फिल्मे दिखाई जाती है ! ऐसे सीरियल दिखाए जाते है जो बहुत भाउक होती है ! ऐसी किताबे लायब्रेरी में रखी जाती है जो भीतर छिपी गहरी भावनाओं को उभार कर लोगो को रुला सके !
तो देर मत करना जब भी मौका मिले जी भर कर रोईये यह मत सोचिये कौन क्या कहता है ! उसी समय आँसुओं को बरस जाने दीजिये फिर आपकी आँखे जिवंत हो उठेंगी,उनमे एक चमक होगी, और आपकी इन आंखोमे आपका कोई अपना जब आँखे डालकर देखेगा या देखेगी बड़ा सुखद अनुभव होगा !

11 टिप्‍पणियां:

  1. इन बहते आँसुओं को मत रोको
    इन्हें बहने दो !
    इन आँसुओं के खारेपन में
    जीवन के अनंत दुःख धुल जाने दो !

    बढ़िया आलेख,बेहतरीन पोस्ट,सुमन जी
    .
    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: आँसुओं की कीमत,....

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  2. बहुत सुन्दर रचना...उत्तम प्रस्तुति!...बधाई सुमन जी!

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  3. चलिये रोने के कुछ तो फायदे हैं ... बढ़िया प्रस्तुति

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    --
    संविधान निर्माता बाबा सहिब भीमराव अम्बेदकर के जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-
    आपका-
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. रोने के लिए एकांत बहुत महत्वपूर्ण है। कई बार व्यक्ति पूजा-पाठ के समय भी भाव-विह्वल होकर रोने लगता है। जब न सुख का ध्यान रहे,न दुख का,रोना तब सहज हो जाता है। इसीलिए,ध्यान में उतारने के लिए भी,कभी-कभार साधक को कहा जाता है कि वह किसी दुखद प्रसंग को याद कर रोए। मैं तो शर्मिंदगी के कारण नहीं रो पाता,मगर मैंने कई लोगों को सचमुच ही रोता पाया।

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  6. बहुत सुंदर........................
    बह जाती है सारी पीढा..................अश्रुओं के साथ......बह जाने दो इन्हें...

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  7. इश्वर ने औरत को बहुत दर्द दिए ....लेकिन साथ में दिए आंसू ...वह एक ऐसी नेमत है .....जो सिर्फ हम औरतों के पास है ....रो लेने से वह सारे दुःख बह जाते हैं .....उन्ही में घुलकर ...जबकि इस सुख से आदमी वंचित हैं .....

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  8. बहुत सही कहा। मैं तो खूब-आंसू बहाता हूं ..

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  9. बहुत सुन्दर, आँसू आत्मा का साबुन हैं।

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