सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

ख्याल कभी मेरे .......



      ख्याल कभी मेरे ...
       हो मौन कभी मुखर
 चेतना से इंधन
डलवा कर ...
        चमचमाती, कीमती 
              मोटर, गाड़ियों की तरह 
          राज पथ पर (हाई वे)
        दौड़ते है, कभी खुद 
             पगडंडी बन किसी गाँव 
           क़स्बे में पहुँच जाते !
           कभी फूल- से नाजुक 
         तितलियों से चंचल 
              फूल-फूल पर मंडरा कर 
           पंख अपने रंग लेते !
           कभी सूरज के प्रखर 
        ताप से पिघल कर 
               बाष्प बन हृदयाकाश में 
         भाव की बदली बन 
           छा जाते, बरस जाते 
        मन के आंगन में,
  अनायास ही  
          गीत स्वयं बन जाते 
                 ख्याल मेरे कभी  ........!!

17 टिप्‍पणियां:

  1. कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है,
    अच्छी प्रस्तुति ,.....

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  2. ख्यालों की उड़ान कहाँ से ले जायेगी कुछ पता नह चलता ...

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  3. बहुत सुन्दर सृजन , बधाई.

    मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की नवीनतम पोस्ट पर आप सादर आमंत्रित हैं.

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  4. खूबसूरत पंक्तियों के साथ लिखी गई सार्थक रचना ...

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  5. बहुत खूबसूरत प्रस्तुित है आपकी.
    बधाई स्वीकार कीिजये ...

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  6. ख्याल वह पगडंडी है जिसपर चलकर हम अपनी मंज़िल तलाशते रहते हैं।

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  7. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ...

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  8. ख़्याल की यही विडम्बना है। वह या तो भूत में रहता है या भविष्य में।

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  9. कित्ता सुन्दर गीत..बधाइयाँ.
    ________
    'पाखी की दुनिया' में देखिएगा मिल्की टूथ की बातें..

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  10. खयालों की दुनिया भी कुछ अजीब सी होती है...पर बहुत सुन्दर होती है!

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  11. प्रस्तुति अच्छा लगी । मेरे नए पोस्ट "भगवती चरण वर्मा" पर आपकी उपस्थिति पार्थनीय है । धन्यवाद ।

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