शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

वर्ष एक बीत गया !


वर्ष २०११ का यह अंतिम महिना है ! बस कुछ ही दिनों में नया वर्ष आने वाला है !
आईए हम सब मिलकर हर्ष और उल्लास के साथ इस वर्ष को विदा करते है !
और पुरे उत्साह और आनंद के साथ नए वर्ष का स्वागत करते है !

एक पल आया 
एक पल गया 
एक पल हँसा गया 
एक पल रुला गया 

जीवन पाटी पर कभी गम के 
कभी खुशियों के रंग भरकर 
दिवस एक बीत गया 
वर्ष एक बीत गया !

समय कहाँ कब रुकता है 
कालचक्र चलता रहता है 
कभी आशा है कभी निराशा 
सफलता में छुपी असफलता 

सुख-दुःख में बंधा है जीवन 
धूप-छाँव का खेल तमाशा 
दूर है मंजील, राही अकेला 
रात है छोटी सपने ज्यादा 

जो साकार इन्हें है करना 
कदम कहते है रुक जाना 
समय कहता है चलते जाना 
दूर मंजील को है पाना 

दिवस एक बीत गया 
वर्ष एक बीत गया !

http://sumitpatil88.blogspot.com/2011/12/joe-satriani-art-of-expression.html 

15 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रचना...नव वर्ष की अग्रिम शुभ- कामनाएं

    नीरज

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  2. कविता समय चक्र के तेज़ घूमते पहिए का चित्रण है। कविता की पंक्तियां बेहद सारगर्भित हैं।

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  3. समय कहता है चलते जाना

    दूर मंजील को है पाना .very nice.

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  4. वाह..... बहुत ही सुन्दर रचना

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  5. हां,जो आ रहा है,उसका अभिवादन और जो जा रहा है उसके प्रति आभार का भाव ही सम्यक् जीवन-शैली है।

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  6. विगत को धन्यवाद और आगत का स्वागत।
    सुंदर कविता।

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  7. सुन्दर कविता....
    नव वर्ष की अग्रिम बधाईयां...
    सादर...

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  8. समय कहाँ कब रुकता है
    कालचक्र चलता रहता है
    कभी आशा है कभी निराशा
    सफलता में छुपी असफलता ..

    सच कहा है ... इसलिए इस समय का इस्तिक्बाल करना चाहिए ... इसे जीना चाहिए ..

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  9. इस वर्ष जिन्होंने साथ दिया उनका आभार ....
    शुभकामनायें आपको !

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  10. सुंदर रचना ।
    अच्छा लगा पढकर ।

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुती बेहतरीन रचना,.....
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाए..

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  12. "ये धरती हरी हो, उमंगों भरी हो,
    हर इक रुत में आशा की आसावरी हो
    मिलन के सुरों से सजी बाँसुरी हो
    अमन हो चमन में, सुमन मुस्कुराएं।
    नव वर्ष की शुभ-कामनायें......
    (अशोक चक्रधर जी)

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  13. बहुत सुन्दर रचना....नूतन वर्ष की शुभ कामनाएं!

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