सोमवार, 12 दिसंबर 2011

सर्दी आयी.....



हवा ठंडी 
रात ठंडी 
               
स्वप्न मीठे 
नींद मीठी 
         
भाये मन को
गोद मीठी 
वसुधा की मृदु 
शय्या पर, निशि ने 
ओढ़ ली 
काली रजाई !
           

               

8 टिप्‍पणियां:

  1. जहां मौसम थोड़े वक्त पर बदल जाए,वहीं जीवन की सरसता है।

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  2. बहुत बढिया,
    सुंदर भाव,
    वैसे ठंड तो दिल्ली में भी आ गई

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  3. मन भावन शब्दों से शीत का आगमन किया है आपने ...

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  4. सर्दी के मौसम का सुन्दर स्वागत किया है आपने ....

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  5. सुंदर स्वागत बढ़िया पोस्ट .......
    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

    सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,


    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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