शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

हमारे त्योहार …

इस बार गणेश चतुर्थी पर मेरा बेटा पुणे से हैदराबाद चार दिनों के लिए घर आया हुआ था ! महीनों हुए थे उसे देखे हुए अचानक शुक्रवार की सुबह सुबह उसे सामने देखकर मन में जो भाव थे बता नहीं सकती, आने की बिना खबर दिए अच्छा सरप्राईज दिया उसने हम सबको यहाँ आकर ! घर,परिवार,रिश्तेदार, गणेश चतुर्थी का त्यौहार इन सबके बीच काफी व्यस्त रही मै इन दिनों, न कुछ पढ़ना हुआ न कुछ लिखना हुआ नेट से दूर  … बस अपनों के बीच सबके साथ हँसते खेलते समय कैसे तेजी से बीत गया पता ही न चला ! सबकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना एक गृहिणी के लिए बड़ा  मुश्किल काम होता है, खैर कल ही सभी रिश्तेदार अपने अपने घर चले गए है, बेटा वापिस पुणे अपने जॉब पर, आज से फिर मेरा अपना रूटीन शुरू हुआ है !

आप सबके क्या हाल चाल है ? आप भी त्यौहार के मजे ले रहे होंगे है न ? हमारे शहर में तो भगवान गणेश की पूजा अर्चना के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव प्रारंभ भी हो चूका है ! हर गली मुहल्लों ,सड़कों चौराहों पर विभिन्न आकार, प्रकार के गणेश प्रतिमाएं स्थापित कर भक्तगण विधिपूर्वक पूजा अर्चना कर रहे है ! घर-घर में मेरी जैसी गृहिणियां गणेश जी का मनपसंद भोजन "मोदक" बना रही है ! शहर के पंडालों में मै बड़ा की तू बड़ा कहते हुए जैसे होड़ सी लगी है इन गणेश जी की प्रतिमाओं में, क्यों न हो जिस गली का जितना अधिक चंदा उतने बडे गणपति बप्पा विराजमान हुए है ! पंडालों में पूजा अर्चना और प्रसाद वितरण के बाद  बच्चे,बड़े,बूढ़े सभी झूम रहे है नाच रहे है  " oppa gangnam style "  पर, मूषक पर सवार गणपति बप्पा भी खुश हो रहे है अपने भक्तों को झुमते हुए देख कर ! कुल मिलाकर हमारा हैदराबाद शहर इन दिनों भक्ति रस में डूबा हुआ है !दस दिवसीय गणेशोत्सव बड़े धूम धाम से मनाया जायेगा हमेशा की तरह और फिर विसर्जन !

जीवन के शोक,चिंता और दुखों को भुलाकर मनुष्य अपनों के साथ बैठकर कुछ पल मुस्कुरा सके, हंस बोल सके इन्ही सब बातों को ध्यान में रखकर हमारे त्योहार बने होंगे ! हर त्यौहार अपने-अपने  ऐतिहासिक,सामाजिक,धार्मिक महत्व को दर्शाते है जिससे हमारी संस्कृति को समझा जा सके लेकिन आज कल हर त्योहार उसके पीछे की जो भावना रही होगी उसे विस्मृत कर सिर्फ मौज,मस्ती और दिखावे भर के रह गए है आपको क्या लगता है ?

15 टिप्‍पणियां:

  1. जीवन के शोक,चिंता और दुखों को भुलाकर मनुष्य अपनों के साथ बैठकर कुछ पल मुस्कुरा सके, हंस बोल सके इन्ही सब बातों को ध्यान में रखकर हमारे त्योहार बने होंगे,विल्कुल सही बाते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जी यही हो रहा है ...हमें उत्सवधर्मिता के सही मर्म को सहेजना होगा ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. धार्मिक आस्थाओं को हंसी ख़ुशी के साथ मनाना सुखकर है न कि तरह तरह के नियम उपनियम शुभ अशुभ के तनाव को मन में लेकर..
    मंगलकामनाएं !

    उत्तर देंहटाएं
  4. हर त्यौहार अपने-अपने ऐतिहासिक,सामाजिक,धार्मिक महत्व को दर्शाते है जिससे हमारी संस्कृति को समझा जा सके.
    बहुत सही कहा है .
    कितना चमत्कारी है : रुद्राक्ष

    उत्तर देंहटाएं
  5. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (15-09-2013) के चर्चामंच - 1369 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  6. धार्मिक त्यौहार हमारी आस्थाओं दर्शाते है ,सुंदर सृजन !

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

    उत्तर देंहटाएं
  7. गणेशोत्सव की बधाई. पहले यहाँ मैं भी शरीक होता था हर साल गणेश पूजा में. इस वर्ष निवास स्थान दूर है अपने देश के लोगो के समूह से इस लिए मना नहीं पाया. हाँ गणेश जी की पूजा तो वैसे मैं हर रोज़ करता हूँ.

    उत्तर देंहटाएं
  8. जी, सही कहा. देवता उत्सवप्रिय हैं, भारतीय संस्कृति भी. जीवन एक उत्सव की तरह रहे तो कितना अच्छा हो.

    उत्तर देंहटाएं
  9. बिल्कुल सही कहा हर त्यौहार का अपना अपना महत्त है और हमारे सामाजिक सरोकार से जुड़े हैं

    उत्तर देंहटाएं
  10. जीवन में उत्सवधर्मिता एक नई आशा और उमंग को जन्म देती है, इसी तरह हर दिन उत्सवमय बन जाये तो आनंद ही आनंद है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  11. मौज मस्ती दिखावा तो सब ठीक है पर अगर इन सब के साथ उमंग का वातावरण भी बन जाए तो क्या बात .... सामाजिक सरोकारों से जुड़े सब त्यौहार जरूर मनाने चाहियें ...

    उत्तर देंहटाएं
  12. मौज मस्ती से कम से कम मानसिक तनाव तो दूर होता ही है ... त्योहार से जीवन में एकरसता से बचते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुन्दर प्रस्तुति
    बहुत शुभकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं