शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

लॉफिंग बुद्धा सुख-समृद्धि का प्रतीक ...


लॉफिंग बुद्धा के बारे में ऐसी मान्यता है कि, इनको घर में रखने से भाग्य में वृद्धि होती है और घर में सकारात्मक उर्जा का प्रवेश होता है ! घर में शांति और सौहाद्रपूर्ण वातावरण बना रहता है ! कुछ लोग लॉफिंग बुद्धा को अपने घर के मुख्य द्वार पर इस प्रकार लगाते है कि, आने वालों की नजर इन पर पड़े और ऐसा लगे कि ,बुद्धा हंसकर घर के अन्दर आने के लिए स्वागत कर रहे है ! लॉफिंग बुद्धाओंकी अनेक प्रकार की प्रतिमाएँ बाजार में उपलब्ध  है ! इन प्रतिमाओं को कुछ लोग अपने दुकान, ऑफिस, शोरुम,व्यसायिक स्थलों पर भी लगाते है !लॉफिंग बुद्धा के बारे में बड़ी प्यारी कहानी प्रचलित है शायद इसे बहुत कम लोग जानते होंगे ! सुना है कि ....तीन बौद्ध भिक्षु रहा करते थे ! इनके बारे कहते है हंसी से ही इनको ज्ञान प्राप्त हुआ था ! इसी कारण दुनिया में उपदेश देने लगे कि, हंसना भी ध्यान करने का एक तरीका है ! उन्होंने इसे "हंसी ध्यान" कहा और जिन्दगी भर जहाँ भी तीनों जाते हंसी का सन्देश फैलाते रहते ! पता है एक दिन क्या हुआ ? उन तीनों बौद्ध भिक्षुमेसे एक मर गया ! जो बाकी के दो बौद्ध भिक्षु उसके पार्थिव शरीर के पास बैठ कर हंसने लगे ! उनके इस अटपटे व्यवहार को देखकर आजू बाजू के लोग नाराज होकर गालियाँ देने लगे ...इसपर उन दोनों ने जो उन लोगों को कहा समझने जैसा है ..."हमारे मित्र ने अपनी पूरी जिन्दगी में लोगों को हंसने का सन्देश दिया ...सारा जीवन उसी में लगा दिया ... अगर हम लोग उसे उसके अंतिम समय में हंसकर विदा नहीं करेंगे तो उसकी आत्मा हम पर हंसेगी कि, हम भी दुसरों की तरह जीवन को गंभीरता के बंधनों में जकड लिया है इसलिए मरने से पहले उसकी इच्छा को पूरा करने के लिए हम लोग हंस रहे है "  
अंत में जब अंतिम संस्कार करने के लिए चिता जलाने की बारी आई मौत से पहले भिक्षु ने कहा था  " चूंकि मै अपनी सारी जिंदगी हंसता रहा हूँ, इसलिए हंसी ने मेरे अन्दर की सारी अशुद्धियाँ साफ हुई है इसलिए कृपया मेरे मृत शारीर को नहलाना मत ..जैसा है वैसे ही जलाया जाए ! उसकी इच्छा के अनुसार भिक्षु के मृत शरीर को कहे अनुसार लिटाया गया और चिता को आग लगा दी गई ! पता है क्या हुआ ....चिता में से पटाखों के धमाके होने लगे ....पहले तो बात किसी के समझ में नहीं आयीं पर जब बात समझ में आयी सारे वहां पर मौजूद लोग हंसने लगे ! दरअसल हुआ यूँ कि, उस भिक्षु ने मरने से पहले अपने चोंगे के भीतर पटाखे बांध लिए थे ताकि, मरने के बाद भी लोगों को हंसा सके ....इसलिए तबसे वे "हंसाने वाले बुद्ध" या लॉफिंग बुद्धा कहलाने लगे !

"जब भी हम हंसते है मन विचार शून्य हो जाता है , विचार शुन्यता में ध्यान घटित होता है कभी इसपर ध्यान देकर देखिए" ...

7 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति बहुत ही अच्छा लिखा आपने

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  2. लाफिंग बुद्धा की कहानी बहुत अच्छी लगी..
    बहुत ही अच्छी पोस्ट..
    :)))))

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  3. हंसना इसलिए भी ज़रूरी है कि सभी प्राणियों में केवल मनुष्य ऐसा है जिसके मुंह पर हंसी फबती है। बाक़ियों के तो हंसने की कल्पना से ही हंसी छूटती है।

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  4. हंसने का संदेश देती .....सार्थक पोस्ट .....अच्छी लगी कहानी ...!!शुभकामनायें ....!!

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  5. इस ज्ञान-वर्धन के लिए शुक्रिया सुमन जी ,बहुत अच्छी कहानी थी
    साभार

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  6. बहुत अच्छी लगी ये कहानी ...
    अपनी मृत्यु में भी दूसरों को हंसाने का प्रयास ... बहुत साहस चाहिए ..

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  7. buddhache nav vaprne yogya nahi ]buddha vidnyanvadi hote he ayogya aahe

    datta shelke

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