बुधवार, 22 अगस्त 2012

क्रोध का रूपांतरण ......

कल किसी कारणवश बाहर जा रही थी ! सड़क के चौराहे पर ग्रीन सिग्नल मिलते ही वाहनों का काफिला चल पड़ा ! इतने में एक कार ने दूसरी कार को धक्का मारा ! जरासा धक्का क्या लगा कि,गाडी में बैठे दोनों युवक अपनी अपनी कार से उतर पड़े और वही हुआ जो होना था तू-तू मै-मै से लेकर गालियों से लेकर मार-पिट तक मामला चला ! ट्राफिक जैम हुआ लोग उतर कर तमाशा देखने लगे ! तमाशा देखने वालों क़ी कमी थोड़े ही है दुनिया में ? कुछ लोगों को हिंसा फैलाने में मजा आता है तो कुछ को देखने में ! कारण चाहे छोटे हो या बड़े हो लेकिन हर मनुष्य क्रोध से जैसे उबल रहा है ! सुबह उठकर कोई भी समाचार पत्रिका उठाकर देखिये ज्यादातर खबरे अपराध, हिंसा से भरी पड़ी है ! हम जिसे प्रगतिशील युग कह रहे है आज के इस युग पर नजर डालिए तो, हर छोटे-बड़े शहरों में हिंसा हो रही है ! कुछ दिन पूर्व पुणे में एक के बाद एक बम ब्लास्ट हो, या फिर हाल ही में अमेरिका में हुये गुरुद्वारे में निर्दोष लोगों क़ी मारे जाने खबर, थियेटर में जेम्स द्वारा अंधाधुन्द गोलिया चलाकर कई मासूम लोगों क़ी जान लेने क़ी खबर ! इस प्रकार क़ी हिंसा करने वाले विक्षिप्त अपराधियों को यह पता नहीं क़ि कौन मरा है और कितने मरे है ! उन्हें तो बस अपना क्रोध प्रकट करना है ! हर रोज सारे विश्व में होने वाली इन घटनाओं पर हम अपनी-अपनी बौद्धिक क्षमता के अनुसार सोचते है तर्क देते है क़ि, इन हिंसाओं के पीछे कारण क्या है ? दूषित माहोल? आधुनिक शिक्षा ? अच्छी परवरिश की कमी ? मानसिक असंतुलन ....बहुत हद तक ये सब बाते सही होते हुये भी क्रोध का बुनियादी कारण है ध्यान का अभाव! सनातन काल से हमारे बुद्ध पुरुष ध्यान क़ी देशना देते आ रहे है ! महावीर क़ी करूणा हो चाहे बुद्ध क़ी अहिंसा हो किसी क़ी थोपी हुई नहीं बल्कि ध्यान के सूत्रों पर आधारित है ! हमेशा हिंसा क़ी ओर प्रेरित करने वाली क्रोध क़ी उर्जा को ध्यान से रूपांतरित किया जा सकता है ! हिंसक अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा देकर कानून यह सोचता हो क़ि, अपराध कम होंगे हिंसा कम होगी लेकिन यह कभी हुआ था न कभी होगा ! इसका मतलब यह नहीं क़ि अपराधियों को खुला छोड़ दे ! लेकिन एक बड़े पैमाने पर आज मनुष्य को ध्यान याने मेडिटेशन क़ी जरुरत है !

15 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्कुल सहमत हूं
    बहुत जरूरी है मेडिटेशन

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  2. बहुत ही व्यापक चिंतन से उपजी यह पोस्ट है……

    आपने सत्य कहा… "महावीर क़ी करूणा हो चाहे बुद्ध क़ी अहिंसा हो किसी क़ी थोपी हुई नहीं बल्कि ध्यान के सूत्रों पर आधारित है ! हमेशा हिंसा क़ी ओर प्रेरित करने वाली क्रोध क़ी उर्जा को ध्यान से रूपांतरित किया जा सकता है !"

    आज जमाने में व्याप्त हिंसा प्रेरक क्रोध का मूल - तनाव, अधैर्य, आवेश, आक्रोश में छुपा है और इन भावों को जगाने वाले सारे संसाधन हमारे आस-पास पसरे रहते है, बचना दूभर है। ध्यान भी ऐसा हो जिसमें चिंतन, आत्मसजगता और विवेक जागृत रहे। इस ध्यान में शुभ-चिंतन संतोष, सहनशीलता और धैर्य को डेवलप करने की साधना होनी चाहिए।

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    1. जी, सही कहा है आपने सहमत हूँ !
      टिप्पणी के लिये बहुत आभार ....

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  3. जीवन में सहनशक्ति का अभाव व ठहराव का न होना इन दोषों का कारण है

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  4. क्रोध का अंत पाश्चाताप से ही होता है |

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    1. उर्जा एक स्थान से दुसरे स्थान पर मूव करती है ध्यान रहे पश्चाताप क्रोध का ही दूसरा रुप है अंत नहीं
      क्रोध और पश्चताप एक ही सिक्के के दो पहलु है जब भी हम क्रोध के बाद पश्चाताप करते है समझ लेना कि,
      क्रोध फिरसे करने क़ी तैयारी चल रही है, और आपको ये ख्याल होगा कि हम बार बार ये रिपीट कर रहे है !
      जब भी क्रोध मन में उठे तो बिना एक्शन किये सजगता से इसे देखना है
      सजगता में ही क्रोध का रूपांतरण होता है !

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  5. क्रोध ने सदा हनी ही की है पर फिर भी इस पर हम नियंत्रण नहीं कर पाते हैं | सार्थक पोस्ट बधाई |

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  6. आक्रोश में ही छुपा है,जब दिल मे उठता शूल
    तनाव अधैर्य आवेश ही ,प्रेरक क्रोध का मूल,,,,,,

    RECENT POST ...: जिला अनूपपुर अपना,,,
    RECENT POST ...: प्यार का सपना,,,,

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  7. प्रेम और अहिंसा को किताबी बातें बताकर हिंसा का सामान्यीकरण किया जा रहा है। लोग भी होश छोड़कर निरे जोश के पीछे दौड़ रहे हैं। आपने सही कहा, ध्यान आज की आवश्यकता है, अपने भविष्य पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है!

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  8. ध्यान स्वयं में एक मुकम्मल प्रक्रिया है। वह कभी बेकार नहीं गया है। क्रोधी व्यक्ति यदि ध्यानी हो जाए तो कायाकल्प कर सकता है। तभी जेलों में भी ध्यान और योग की कक्षाएं लगाई जा रही हैं।

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  9. सच है की आज मेडीटेशन की जरूरत है ... पर शायद बढ़ता हुवा भोतिकवाद भी इसकी एक वजह है ... कोई अपने आराम में खलल नहीं चाहता ... दूसरे की देख नहीं पाता ...

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  10. हाँ आज की आपधापी में कुछ देर ध्यान के तौर पर खुद के साथ बिताना आवश्यक है .....

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  11. सहन शीलता की कमी जिम्मेदार है इनके लिए

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