बुधवार, 11 जुलाई 2012

विनाश और सृजन का चमत्कारिक खेल .....


  •  सच्चे सरल व्यक्ति को कौन पसंद नहीं करता, वह भी ऐसा ही है सभी उसे पसंद करते है ! उसकी दिनचर्या भगवान की प्रार्थना से शुरू होती है ! लेकिन कुछ दिन पूर्व दुर्घटना में उसके दोनों पैर आहत हो गए ! हालत इतनी ख़राब हो गई कि, उसके दोनों पैरों को काट देना पड़ा ! और सर्जरी करते हुये डॉक्टरों को यह पता चला कि,उसके पैर क़ी एक हड्डी में कैंसर था ! यदि उसके पैर को नहीं काटा जाता तो, कुछ ही समय में वह कैंसर पैर क़ी दूसरी हड्डियों में फैल जाता ! परिवार और मित्रों ने उसके दोनों पैरों को काटना भगवान के चमत्कार से कम नहीं समझा !
  • कुछ महीने पूर्व वह विश्व मिडिया क़ी सुर्ख़ियों में छाया रहा ! उसके कंप्यूटर्स व इलेक्ट्रानिक जगत के सृजनात्मक योगदान क़ी सराहना होती रही ! आई मैक,आई फोन, आई ट्यून्स, आई पॉड.....इलेक्ट्रानिक्स के इस युग में गैजेट्स डिजाईन के क्षेत्र में वह प्रेरणा स्त्रोत रहा ! ऐपल इनकारपोरेशन का यह सह संस्थापक और चेअरमन हास्पिटल के एक वार्ड में कैंसर जैसे भयंकर जानलेवा बीमारी से हिम्मत से लड़ रहा था लड़ ही नहीं रहा था बल्कि,बिस्तर पर लेटे-लेटे एक्स रे जैसे उपकरणों और अन्य मशीनों के बेहतर से बेहतर डिजाईन अपने पैड पर स्केच कर रहा था ! क्योंकि वो अपने आस-पास क़ी दुनिया को बेहतर और सुंदर देखना चाहता था ! जब डॉक्टरों ने कहा क़ि यह उसके जिंदगी क़ि आखरी रात है तो,उस रात सब के साथ हंसी मजाक करते हुए ...अपनी आँखे मूंद ली ! जीवन क़ी इस सच्चाई को हँसते -हँसते स्वीकारते अंतिम बार आँख खोल कर सबकी ओर मुस्कुराकर देखा ओर संतुष्ट आखरी सांस ली !
  • लगभग तीस यात्रियों को ले जा रही बस अचानक हिचकोले खाकर उसका संतुलन बिगड़ गया और बस गहरे खाई में गिर गई ! सारे के सारे यात्री मारे गए सिर्फ एक नन्ही सी बच्ची को छोड़कर ! सारे देखने वाले लोग अस्तित्व के इस चमत्कार पर चमत्कृत रह गए !
भूकंप सुनामी कभी-कभी इतना रौद्र रूप धारण कर लेते है क़ि, पलक झपकते ही हजारों लाखों क़ी संख्या में  घर परिवार धरती में समां जाते है ! एक नहीं दो नहीं सेंकडो ऐसी घटनायें है जो हमें बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है ! हर मनुष्य अपने अपने तर्कों से उत्तर पाने क़ी कोशीश करता है ! उत्तर तो नहीं मिलते पर थोड़ी सांत्वना मिल जाती है जीने के लिये ! इस रहस्यमय अस्तित्व में चमत्कार एक के साथ ही क्यों हुआ ? दुसरे उनतीस का क्या कसूर था ? कैंसर उनको क्यों होता है जो शराब सिगरेट नहीं पीते है ? एक नहीं पुरे तीस यात्री बच जाते तो कितना बड़ा चमत्कार होता है ना ? कैसे एक व्यक्ति ही इश्वर के आशीर्वाद का हक़दार होता है ? तमाम ऐसे प्रश्न है जो अस्तित्वगत पहेलियों से कम नहीं है ! हम सब उस परमात्मा के असीम रहस्यमय उर्जा से आविष्ट है उससे भाग नहीं सकते ! अस्तित्व के गर्भ में अनेक ऐसे रहस्य छुपे हुये है जिसको जान पाना हम मानव मन के बस क़ी बात नहीं है ! विनाश ओर सृजन का यह खेल सदियों से चलता आ रहा है चलता रहेगा ! लेकिन  इसकी सतह पर फलता -फूलता जीवन हर पल गतिमान भी होता रहेगा !

12 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी पोस्ट कल 12/7/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 938 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  2. कभी कभी हो जाता है, ऐसा चमत्कार,
    विनाश ओर सृजन का,ईश ही रचनाकार,,,,,,

    RECENT POST...: राजनीति,तेरे रूप अनेक,...

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  3. इश्वर के रहस्यों की खोज बाकी है ...

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  4. ye dunia aise bahut se chamatkaron se bhari hai aapki post bhi yahi sabit karti hai.sarthak post.aabhar.

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  5. बहुत कुछ आज भी उस सर्वशक्तिमान के हाथ ही है.....

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  6. ऐसी घटनाएं ही ईश्वर के प्रति आस्था बनाए रखती हैं। यह आस्था ही कारण है हमारे होने का। हमारा होना ही आधार है ईश्वर के अस्तित्व का। है न फुल सर्कल?

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  7. बहुत सुंदर
    अभी उस रहस्य तक पहुंचना बाकी है

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  8. यह रहस्य शायद ही कभी समझ आये, जितना सोचा उतना ही उलझते गये. सो ईश्वर की लीला देखकर चमत्कृत होते रहने के और कुछ नही किया सकता. उत्कृष्ट आलेख.

    रामराम.

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  9. लाजवाब प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट "अतीत से वर्तमान तक का सफर पर" आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  10. विनाश और सृजन ऐसे कई प्रश्न खड़े करती है जिसका जवाब केवल ऊपर वाले को ही पता होता है ....
    सुंदर प्रस्तुति ....

    जीवन क़ी इस सच्चाई को हँसते -हँसते स्वीकारते अंतिम बार आँख खोल कर सबकी ओर मुस्कुराकर देखा ओर संतुष्ट आखरी सांस ली !
    थोड़ी आँखें भर आई, किसी की याद आ गयी ...

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