शुक्रवार, 3 जून 2011

अहिंसा:परमो धर्म!


सुंदर विचार तभी सार्थक है
जब उसमे सत्य की झलक हो !
सत्य तभी सार्थक है जब
उसमे सौंदर्य की झलक  हो !
सत्य और सौंदर्य एक दुसरे के
पूरक है !
कभी किसीकी कविता की
चार पंक्तियाँ भी ह्रदय को छू जाती है ! 

कभी किसीके गीतों के सुंदर बोल भी अधर
गुनगुनाने को अधीर हो उठते है !
कभी-कभी तो कितने भी सुंदर,सत्य विचार क्यों न हो
हमारे समझ से परे लगते है ! 

समझ में ही नहीं आता कि रचनाकार
अपनी रचना द्वारा क्या समझाना चाहता है !
ऐसे में ......
बौखलाकर-तिलमिलाकर कुछ भी
टिका-टिप्पणी करने से पहले
एक मिनिट धैर्य से उस रचना को
बार-बार पढ़िए ! 

फिर भी बात समझ में नहीं आये तो,
सरल -सा मधु-मक्खी का गुरुमंत्र अपनाइए  

जैसे ....
एक मधु-मक्खी मधुर रस की
चाह लिए, 

फूल पर मंडराकर उसके गंध को,सौंदर्य को
बिना इजा पहुंचाए,शांति का पाठ पढाकर गूजर जाती है
ऐसे ही आप गूजर जाइये
"अहिंसा:परमो धर्म" का गुरुमंत्र अपनाइये !
नोट : इस गुरुमंत्र का उपयोग
हम अपने जीवन शैली में भी
इस्तमाल कर सकते है !
क्योंकि कौन नहीं चाहता है शांति ?
किन्तु शांति के लिए शब्दों की
तलवारे चलाना क्या ये जरुरी है ?

20 टिप्‍पणियां:

  1. कभी किसीकी कविता की
    चार पंक्तियाँ भी ह्रदय को
    छू जाती है ! कभी किसीके
    गीतोंके सुंदर बोल भी अधर
    गुनगुनाने को अधीर हो उठते है !
    कभी-कभी तो कितने भी,
    सुंदर,सत्य विचार क्यों न हो
    हमारे समझ से परे
    लगते है !
    bahut sahi bat aur bahut sundar dhang se abhivyakt kee hai.badhai.

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  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (04.06.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:-Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
    स्पेशल काव्यमयी चर्चाः-“चाहत” (आरती झा)

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  3. ब्लॉग जगत की कहानी लगती है ...आपकी इच्छा पूरी हो, यही कामना है ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  4. सुंदर विचार तभी सार्थक है
    जब उसमे सत्य की झलक हो !
    सत्य तभी सार्थक है जब
    उसमे सोंदर्य झलकता हो !
    सत्य और सोंदर्य एक दुसरे के
    पूरक है !
    बिलकुल सत्य कहा आपने !
    बहुत ही गहरे भावों को समेटे उत्कृष्ट रचना....क्या चित्रण किया है..लाजवाब.......!!

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  5. सुंदर सन्देश देती गहन अभिव्यक्ति....

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  6. गुरुमंत्र अपनाइए जैसे ....
    एक मधु-मक्खी मधुर रस की
    चाह लिए, फूल पर मंडराकर
    उसके गंध को,सोंदर्य को
    बिना इजा पहुंचाए,शांति का पाठ
    पढाकर गूजर जाती है
    ऐसे ही आप गूजर जाइये
    sunder abhivyakti
    saader
    rachana

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  7. अरे, ये तो जैसे जानी पहचानी बात हो...बहुत बेहतरीन!!

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  8. आदरणीया सुमन जी
    सादर सस्नेह अभिवादन !

    अच्छा संदेश है कविता में
    'सत्यम् शिवम् सुंदरम्' की अवधारणा को इसीलिए तो हमारे यहां स्वीकार किया गया है …

    और मधुमक्खी के गुरूमंत्र की बात आपने ख़ूब कही ।

    वहम पाले बैठे लोगों को उनकी रचना की बताई गई ख़ामियां वाकई नहीं पचती … कल ही एक अनुभव हुआ है … ख़ैर !

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  9. बिलकुल सत्य कहा आपने !

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  10. सुन्दर सन्देश के साथ बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने!

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  11. suman ji

    bahut hi gahan abhykti ko prkat karti hai aapki ye anupam rachna aur ek sndeshatmakta bhari sekh bhi .aapne sach ko ujagar karne ki koshish ki hai.
    sach! bahut bahut achhi post
    bdhai
    poonam

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  12. 1 सत्यं शिवम सुन्दरम
    2 जब कवि को स्वयं कविता समझ में नहीं आती तो वह छपने भेज देता है।
    3 जब तलक ये शव्द वाण न चलाले तब तक चैन जो नहीं मिलता । आप कौन ?बोले खामुखां

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  13. Sach kaha hai ... ye baat sirf apne andar utaarne ki hai ... achhee seekh ...

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