गुरुवार, 26 मई 2011

जीवन है एक सरगम ! (गीत)

आज क्यों दर्द भरे है
स्वर वीणा के !

चाहे हंसकर गाओ
चाहे गाओ रोकर
जीवन है एक
सरगम !

नित जीवन गीत
सुनाने वाले
सरगम के
आज क्यों दर्द भरे है
स्वर वीणा के !

प्रात कभी एक
हंसा गए
साँझ कभी एक
रुला गए
रूठे सहज-सरल
भाव मन के !

आज क्यों दर्द भरे है
स्वर वीणा के !

जब ढीले-ढाले
कुछ अधिक कसे
हुये हो तार मन के
कैसे हो स्वरसाधन ?
बिखर-बिखर गए
तार वीणा के !

आज क्यों दर्द भरे है
स्वर वीणा के !

रोज की हमारी भागदौड़, एकदुसरेसे आगे होने की प्रतियोगिता,जीवन के संघर्ष में न जाने हमारे ह्रदय  का संगीत कहीं खो गया है ! विचारोंके अराजक कोलाहल में मन वीणा के तार बिखर गए है !

19 टिप्‍पणियां:

  1. aapne to khud hi sab kah diya aur vah bhi har shakhs ke samne aaina rakhkar.bahut sundar badhai.

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. बहुत खूब ....शुभकामनायें आपको !

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  4. बहुत सुंदर रचना ...... सच जीवन की आपधापी में बहुत कुछ खो गया है.....

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  5. आज क्यों दर्द भरे है
    स्वर वीणा के !

    बहुत सुंदर गीत लिखा है सुमन जी. जीवन कि उहापोह ऐसे ही चलती रहेगी. सुंदर प्रस्तुति के लिए आपको बधाईयाँ.

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  6. चाहे हंसकर गाओ
    चाहे गाओ रोकर
    जीवन है एक
    सरगम !

    जी, बहुत मार्मिक है आपकी पक्तियां.

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  7. बिखर-बिखर गए
    तार वीणा के !
    सच कहा आपने अब वह मधुर प्यार का संगीत खो चूका है , दिल तक पहुँच गयी रचना , बधाई

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  8. suman ji
    bahut hi sundar lagi aapki rachna.
    jivan to sach me sangeet hi hai .kabhi khushi ,kabhi gam .kabhi ekagrata to kabhi mahfil me sargam ki dhun hamesha hi kisi na kisi rup me jivan se judi hati hai .tabhi to log kahte hain ki jivan sangeet hai kab iske taar tut kar bikhar jayen sunischit nahi .
    bahut hi gahan abhivykti ko parilaxhit harti hai aapki behatreen post
    bahut bahut badhai
    poonam

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  9. बहुत ही अच्‍छा लिखा है आपने ।

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  10. बहुत खूब ... ये सच है की रोज़-मर्रा में जीवन की मधुर पल खो जाते हैं ...

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  11. बहुत ही उम्दा है जी !मेरे ब्लॉग पर जरुर आए ! आपका दिन शुब हो !
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    Shayari Dil Se

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  12. रोज की हमारी भागदौड़, एकदुसरेसे आगे होने की प्रतियोगिता,जीवन के संघर्ष में न जाने हमारे ह्रदय का संगीत कहीं खो गया है ! विचारोंके अराजक कोलाहल में मन वीणा के तार बिखर गए है !

    Suman ji ,
    It's so true ! People have become so mechanical. we need to Enjoy life simultaneously.

    .

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  13. अजब है दास्तां तेरी ये जिन्दगी कभी हंसा दिया रुला दिया कभी। अच्छी रचना । भगवान बुध्द के उपदेश की झलक इस रचना में वीणा के तारों वाली। तो फिर यही कहना होगा कि इस जिन्दगी को ज्ञानी काटे ज्ञान ते मूरख काटे रोय

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  14. आज क्यों दर्द भरे है
    स्वर वीणा के !

    सब कुछ खोगया है इस जिन्वन दौड में .... बहुत खूबसूरत रचना

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  15. आपकी रचनाएं हमेशा ही एक संदेश देती हुई होती हैं। पढने में वाकई अच्छी लगती है।
    आज क्यों दर्द भरे है
    स्वर वीणा के !

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  16. महेंद्र श्रीवास्तव जी,
    पता नहीं क्या बात है पिछले कुछ दिनोंसे
    आपके ब्लॉग पर कमेन्ट्स नहीं लग रहे है
    शायद नेट की कुछ समस्या होगी !
    जो ब्लोगर मित्र नियमित मेरे ब्लॉग पर
    टिप्पणी करते है मेरा भी हमेशा यही प्रयास
    रहता है की. मै भी उनके ब्लॉग पढ़कर टिप्पणी करूँ !
    नेट की समस्या ठीक होने का इंतजार है !
    आपका आभार,सभी मित्रोंका आभार !

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  17. बहुत ही खूब !
    अच्छा लगा यहाँ पर आकर पोस्ट को पढ़ कर !
    मेरी नयी पोस्ट पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion - अज्ञान

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