शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

सूरज की दादागिरी !

उधर
पानी का स्तर
घट गया !
इधर
पानी को लेकर
झगड़े बढ़ गए
सप्लाई कम हुई !
ऐसे में देखिये
बढ़ गई
सूरज की दादागिरी !
किरण किरण
लिए संग
उलीच उलीच कर
जलाशयों से घर
ले जा रहा है
पानी  ... !

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ... यही तो विसंगती है

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति 99वीं जयंती - पंडित रवि शंकर और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान जरूर बढ़ाएँ। सादर ... अभिनन्दन।।

    जवाब देंहटाएं
  3. दादागीरी नहीं भगिनी सुमन, इसे डकैती कहते हैं. दिन दहाड़े पानी चुराकर ले जाता है!बहुत ख़ूब..!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही खुबसूरत
    बहुत उम्दा लिखा है...!

    जवाब देंहटाएं
  5. है तो दादागिरी ...
    लेखन कम क्यों ?

    जवाब देंहटाएं
  6. लेखन कम किया नहीं हुआ है, एक तो परिवर्तन का असर हर चीज़ पर पड़ा है तो लेखन पर भी
    पड़ा है ! तब इसलिए निरंतर नियमित लिखती थी कि आप सब मित्रों को यह दिखाना था कि
    मैं भी कुछ “हूँ” ! अब सिर्फ़ हूँ यही आप सबको बताने के लिए लिखती हूँ !
    आभारी हूँ ब्लॉग पर आने के लिए , प्रणाम स्वीकारें !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रणाम !
      आप महत्वपूर्ण थीं और हैं ...आप जैसे पाठक लेखक, जान होते हैं रचना की !
      आभार

      हटाएं