शुक्रवार, 11 मार्च 2016

नीम के ये पीले पत्ते ...

कुछ दिनों से देख रहीं हूँ
पेड़ की सुखी टहनियों से
टूटकर निर्लिप्त से, 

नीम के ये पीले पत्ते 
हवाओं की सरसराती ताल पर,
नाचते,थिरकते, आनंद मग्न,
उत्सव से भरे मेरे आंगन में
झर रहे है !
मानों कह रहे है ...
जिस धरती से हमने जन्म लिया
वापिस उसी धरती की गोद में,
विश्राम करने जा रहे है
हम मर नहीं रहे है !
मुझे लगा क्या पता
मृत्यु की कला सीखा रहे है !
नीम के ये पीले पत्ते  .. !

13 टिप्‍पणियां:

  1. यही जीवन का अंत है .बहुत सुंदर .

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  2. जीवन का यथार्थ , भोगना सबको है , चाहे जड़ हो या चेतन ! मंगलकामनाएं ....

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  3. " गागर में सागर".... अति सुन्दर अभिव्यक्ति।

    http://safaltasutra.com/

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  4. मृत्यु की कला सिखाते ये झरते नीम के पत्ते। वाह सुमनजी, अनोखी कल्पना।

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  5. मृत्यु की कला सिखाते ये झरते नीम के पत्ते। वाह सुमनजी, अनोखी कल्पना।

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  6. जितन भी जीवन जीते हैं आनंद से जीते हैं ... शायद यही बहुत है उनके लिए ...किसी को प्रेरित क्र जाते हैं किसी को अवसाद से भर जाते हैं ... सुन्दर कल्पना को शब्द दिए हैं आपने ...

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  7. झड़ते पतों से जीवन का सच बहुत ही सरल शब्दों में ब्यान हुआ है। बधाई !!

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  8. सच तो यही है की मृत्यु की ही कला सिखाते हैं ... दार्शनिक प्रस्तुति

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