गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

चमचासन .....


"सबसे पहले सीधे खड़े हो जाओ, चेहरे पर भोलापन और आँखों में मक्कारी लाओ ! धीरे-धीरे भोलेपन को दीनता में बदलो, टांगों को सीधा रखकर धीरे से झुककर नाक को अपने आका के जूतों पर रगड़ों ! गहरी-गहरी सांस लेकर कुहनियों को पेट से सटाकर दोनों हाथ जोड़ो, प्रणाम की मुद्रा बनाओ ! शुरू-शुरू में थोड़ी तकलीफ होगी स्वाभिमान आड़े आएगा लेकिन घबराओ नहीं, निरंतर आभ्यास से स्वाभिमान का सत्यानाश होकर साधक योग्य चमचा बनकर अनेक लाभ पायेगा " ! दुनिया में एक से एक योगासन प्रचलित है लेकिन हमारे देश में एक ही आसन है जो काफी प्रख्यात, विख्यात है वह है यह चमचासन ! यह कैसा योगासन है ? और मै आपको यह क्यों सिखा रही हूँ यही सोच रहे है ना आप ? माफ कीजिये यह आसन हमारे सुधी पाठकों के लिए नहीं है ! लेकिन नेता बनने के लिए चमचासन की बहुत जरुरत पड़ सकती है !

 दरअसल आज किचन में खाना बनाते हुए मै सोच रही थी ये फोर्क, स्पेचुला, छोटे-बड़े हर आकार प्रकार के स्टील के चमचे न होते तो गृहिणी भी कभी "अन्नपूर्णा" का सम्मान  पाती भला ? नहीं ना ..अपने किचन में घंटों खपती है भांति-भांति के स्वादिष्ट व्यंजन बनाती है इन्ही चमचों की बदौलत ! पाक शास्त्र का सारा ज्ञान और सारा कौशल लगा देती है इन चमचों की बदौलत ! मन का सारा स्नेह उंडेल देती है पकवानों में इन चमचों की बदौलत ! लेकिन मै जिन चमचों का जिक्र कर रही हूँ वो है नेताओं के चमचे, जिसे हम सब चेला, चाटुकार, चापलुस वगैरे नामों से जानते है ! यदि देखा जाय तो सबको चमचों की जरुरत पडती है ..सबके ही अपने-अपने चमचे होते है लेकिन नेताओं के चमचे कुछ अनोखे और खास होते है ! कहीं तोड़-फोड़ करनी हो कि, आग लगानी हो चमचे सदा तत्पर रहते है अपने स्वामी की आज्ञा पालन करने ! इन्ही चमचों की बदौलत विभिन्न प्रकार के विवाद और तनाव उत्पन्न होते रहते है ... शहर में अशांति फैल जाती है ! अपने आकाओं की हर गलत बात को सही सिद्ध करना इनका एकमेव उद्देश होता है ! अपने आका की नमक अदायगी करते ऐसे चमचे आपको हर शहर में मिल जायेंगे ....भक्त और भगवान का रिश्ता होता है इन दोनों में !  चमचासन एक ऐसा ही आसन है जिससे गुजरे बिना कोई साधक योग्य चमचा नहीं बन सकता ..... कैश और ऐश करने का बड़ा आसान आसन है यह चमचासन ......!!

16 टिप्‍पणियां:

  1. हाहाहा .....सुन्दर प्रस्तुति

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  2. बहुत सही ........सुमनजी .....सुन्दर ..सटीक ...और हमेशा सामायिक ...!!!

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  3. कैश और ऐश करने का बड़ा आसान आसन है यह चमचासन,,,,
    यह नेताओं के इर्द गिर्द ज्यादा दिखाई देता है


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  4. सटीक बात

    हम को खबर लगी आज कल अब ये
    चमचों की होने लगी आज भरमार है

    साहेब जब हँसतें हैं हंस देते चमचे भी
    साथ साथ रहने को हुए बेकरार हैं

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  5. कमाल है ...
    आपके पास इतने चमचे हैं ??
    बधाई :))

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    1. इतने चमचे है ??
      इतने तो हर गृहिणी के किचन में होते है ....लेकिन पुरुष महाशय कभी किचन में झांकेंगे तब ना :)

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    2. @ इतने तो हर गृहणी के ( किचन ) होते हैं ..

      आनंद ही आनंद है , बेचारे पुरुषों के पास एक भी नहीं :(

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  6. इतने विभिन्न प्रकार के चमचों के चमचासन के बारे में जानकर आनंद आ गया, आखिर विचार भी रसोई में ही आया?:)

    रामराम.

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  7. सुमन जी, आपके इस सामयिक व्यंग्य को स्वर देने का प्रयास किया है, निम्न लिंक पर:
    बोलती कहानियाँ - सुमन पाटिल का व्यंग्य चमचासन

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