मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

किसी से उनका प्यार न छीनो ..


अंग्रेजी का 
  रोज 
बंगाली का 
 गोलाप 
गुजराती का 
 सेबोती 
तेलुगु का 
 गुलाबी 
संस्कृत का 
 सतपत्री 
उर्दू,हिंदी का 
 गुलाब 
चमन में 
अमन फैला
  कर 
क्या खूब 
मुस्कुराते है 
कंटकों में भी 
ये सुमन ....!

 ***
मत छीनों 
किसी से 
उनका प्यार
न छीनो 
सुन्दर सपनों 
का संसार 
न छीनो 
भौरों से 
फूलों का 
आराधन 
परवानों से 
शमा पर 
मर मिटने का 
अधिकार 
न छीनों 
इश्क के 
ठेकेदारों ...!

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत भावपूर्ण ...बहुत सुंदर रचना ...

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  2. काश लोग फूलों की भाषा समझते तो उनसे प्रेरणा लेते ....

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  3. सुन्दर...सुरभित सुमन सी......
    प्यारी अभिव्यक्ति...दोनों ही.

    सादर
    अनु

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  4. प्यार और सौंदर्य की अनुभुति को शब्द दे दिये आपने, बहुत सुंदर.

    रामराम.

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  5. बहुत सुंदर प्रेरणादायक अभिव्यक्ति,,,,लाजबाब,,,,बधाई सुमन जी,,,,

    Recent Post दिन हौले-हौले ढलता है,

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  6. गुलाब को अन्य भाषाओं में क्या कहते हैं इसकी अच्छी जानकारी मिली ... सुंदर रचना

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  7. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,सुमनजी
    साथ ही ज्ञान वर्धन भी ,बढ़िया
    साभार.........

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  8. हर शब्द की आपने अपनी 2 पहचान बना दी क्या खूब लिखा है "उम्दा "
    मेरी नई रचना

    प्रेमविरह

    एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

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  9. बहुत सुन्दर सन्देश देती उत्कृष्ट प्रस्तुति सुमन जी ! काश इश्क के ठेकेदार सुकुमार फूलों की सुकुमार भाषा को समझ पाते ! अति सुन्दर !

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  10. कठिन परिस्थितियों में जीवित
    कलियों को अभिशाप बहुत है !
    कठिन यातना उनको देने ,
    जग ने किये उपाय बहुत हैं !
    इन फूलों की गंध सूंघ कर, भौंरे जीवन पाते हैं !
    सुरभितसुमन हमेशा जग को,कुछ राहत दे जाते हैं !

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  11. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  12. बहुत सुंदर ....अर्थपूर्ण ढंग से दी जानकारी...आभार

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  13. कविता के भाव एवं शब्द का समावेश बहुत ही प्रशंसनीय है

    हर शब्द शब्द की अपनी अपनी पहचान बहुत खूब

    बहुत खूब

    मेरी नई रचना

    खुशबू

    प्रेमविरह

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  14. बाह. सुन्दर.
    प्यार तो है सबसे परे ,ना उसका कोई चेहरा है
    रहमते खुदा की जिस पर सर उसके बंधे सेहरा है

    प्यार ने तो जीबन में ,हर पल खुशियों को बिखेरा है
    ना जाने ये मदन ,फिर क्यों लगे प्यार पे पहरा है

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  16. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  17. बहुत उम्दा ..भाव पूर्ण रचना .. बहुत खूब अच्छी रचना इस के लिए आपको बहुत - बहुत बधाई

    मेरी नई रचना
    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

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  18. भले ही गुलाब के कई अलग अलग संबोधन हों पर महक तो एक ही रहेगी ....:))

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