बुधवार, 12 अप्रैल 2017

सुहाना मौसम है !

ऊंघ रहे क्यों मन
मछुआरे ?
चलो नदी तट पर चले
सुहाना मौसम है !

खूबसूरत शब्दों का
आकर्षक जाल बुने
भावनाओं के आटे से
बनी गोलियां
सुनहरी मछलियों को
खिलायें !


छपाक से डालकर
पानी में जाल
खूब सारी मछलियों को
फंसाये !
चलो नदी तट पर चले
सुहाना मौसम है !


9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 14 अप्रैल 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुंदर रचना। बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ।

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  3. वाह वाह....बहुत ही सुंदर भाव, शुभकामनाएं.
    रामराम

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  4. बहुत खूब ... गहरे भाव हैं ...

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  5. हिन्दी ब्लॉगिंग में आपका लेखन अपने चिन्ह छोड़ने में कामयाब है , आप लिख रही हैं क्योंकि आपके पास भावनाएं और मजबूत अभिव्यक्ति है , इस आत्म अभिव्यक्ति से जो संतुष्टि मिलेगी वह सैकड़ों तालियों से अधिक होगी !
    मानती हैं न ?
    मंगलकामनाएं आपको !
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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    1. पता नहीं सतीश जी,मैंने कभी अपने लेखन को कामयाबी के किन्ही माप दंड़ों से कभी तौला नहीं !लाखों लोग लिखते है और बेहतरीन लिखते है उन सब में खुद को ऊँचा साबित करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सी बात है, किन्तु किसी को निचा साबित करना सस्ता और घटिया रास्ता है ! बहुत से लोग यही काम करते हुए देखे जा सकते है !सृजन मेरे लिए एक खूबसूरत जीवन शैली है (इसमें सिर्फ लेखन ही हो यह जरुरी नहीं) जो इस खूबसूरत अस्तित्व में योगदान करने का एक तरीका है भले ही यह योगदान एक गिलहरी के उस योगदान जितना ही क्यों न हो ! किसी ने मेरे लिखे की प्रशंसा की या नहीं यह बाते गौण है मेरे लिए ! :)

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    2. यही मानव का सबसे बड़ा गुण है , बेहतरीन कर्म के साथ फल की आशा हमें साधारण इंसानों की कतार में ला खड़ा करती है ! मंगलकामनाएं आप ऎसी ही सुदृढ़ बनी रहें

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