शुक्रवार, 10 मई 2013

आदम और हव्वा ...


सुना है कि, जब ईश्वर ने आदम और हव्वा को बनाया था तब वे दोनों ईडन के बगीचे में आनंद पूर्वक रहने लगे थे ! उन दोनों के अलावा उस बगीचे में दूसरा कोई भी नहीं था फिर भी आदम के आने में जरा भी देर हो जाती तो हव्वा एकदम परेशान हो जाती ! आदम से पूछती कि, इतनी देर कहाँ थे ? आने में देर क्यों हुई ? आदम बेचारा हव्वा के इन प्रश्नों से परेशान हो जाता लाख समझाता कि, अरे भई कहाँ जाउँगा तेरे सिवा मेरा कौन है इस बगीचे में ? जाऊंगा भी तो कहाँ जाऊंगा ! जरा बगीचे में टहल रहा था देखो मौसम कितना सुहाना है ...इसीलिए आने में देर हुई ! इसमें इतना बेचैन होने की क्या बात है ? लेकिन हव्वा को आदम की बातों पर विश्वास नहीं होता ! जब रात आदम सो जाता तो हव्वा उसकी पसलियां गिना करती क्योंकि, ईश्वर ने हव्वा को आदम की एक पसली से बनाया था .. ऐसा कहानी कहती है ! वह उसके पसलियों को गिनकर विश्वास करना चाहती कि, पूरी है या नहीं है ! कही एकाध पसली निकाल कर ईश्वर ने कही दूसरी स्त्री तो नहीं बना दी ? हव्वा रोज रात आदम की पसलियां गिनती जब पूरी पसलियां मिलती तभी संतुष्ट हो कर सो जाती ....फिर दुसरे दिन वही प्रश्न वही शक !

इस वैज्ञानिक युग में बहुत कुछ बदल गया है पर आधुनिक आदम और हव्वा के बीच कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है अविश्वास भरे वही प्रश्न वही शक ...इ मेल्स चेक करना, वालेट चेक करना, सेल फोन चेक करना इस प्रकार की कई सारी बाते कई बार आदम की आँखों में हव्वा के प्रति अवहेलना, माथे  पर सलवटे,स्वर में कड़वाहट भर देते है ! प्यार भरे मधुर रिश्ते विश्वास, प्रेम पर टिके होने चाहिए न की शक की बुनियाद पर ...ऐसी बाते कई बार रिश्तों में बहुत बड़ी  दुरिया बना देते है  दे रहे है ...जिन्दगी नरक बनती जा रही है ...होने तो चाहिए थे दोनों सबसे करीबी मित्र पर सबसे करीबी शत्रु बन बैठे है ! दुसरे से प्रेम करने से पहले सोचे आप खुद से कितना प्रेम करते है ? खुद पर कितना विश्वास करते है ? जब तक हम अपने आप से प्रेम नहीं करते दुसरे से कैसे कर पाएंगे ,,,,काश दोनों एक दुसरे की निजता का सम्मान करते ! हर रिश्ते में थोडा तो स्वतंत्रता का स्पेस होना चाहिए तभी रिश्ते फलते फूलते है ! लगता है आज भी कुछ नहीं बदला है ...कही ईश्वर के मना करने के बावजूद  "ज्ञान के वृक्ष" का फल खाने का नतीजा तो नहीं है यह ?

11 टिप्‍पणियां:

  1. गुड मोर्निंग ...
    अविश्वास बेहद दुखदायी है , एक बार अविश्वास आने के बाद यह खाई जीवन भर के लिए यंत्रणादायी हो जाती है..

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  2. प्यार भरे मधुर रिश्ते विश्वास, प्रेम पर टिके होने चाहिए न की शक की बुनियाद पर

    आपने बिल्कुल सही लिखा है, लेकिन ईश्वर ने जब आदम और हव्वा को बनाया तब उन दोनों के दिमाग में एक शक नामक कीडा छोड दिया था जो आज तक नही निकल पाया और ना ही निकलेगा.

    हां इस कीडे को आपसी समझ और सूझबुझ से नियंत्रण में रखा जा सकता है.

    रामराम.

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  3. एक दम सटीक.....
    ये सब ज्ञान का फल खाने का नतीजा है...वैसे ही पैंडोरा ने बॉक्स खोला और सब मुसीबतें शुरू....
    बेहतरीन पोस्ट!!!

    सादर
    अनु

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  4. वाह ! बहुत सुन्दर सोच ...

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  5. प्रेम में भी कुछ तो स्वच्छंदता चाहिए ... सटीक ।

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  6. बहुत ही बेहतरीन सुन्दर सोच,आभार.

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  7. सही कहा जिस दिन इन रिश्तों में विश्वास नहीं रहा ...जिन्दगी नरक बन जाती है. बेहतरीन पोस्ट !!

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  8. बिल्कुल सही, सहमत हूं
    रिश्तों में कडुवाहण की वजह ही है अविश्वास
    बहुत सुंदर

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  9. आधारहीन संशय रिश्ते की जड़ें खोद डालता है।

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  10. suman ji...bahut satik likha hai aapne...vishwaas ki neev par tika rishta hi apni samay-seema ko majbooti ke saath pura karta hai..anytha...to kuch hota hi nahi!

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  11. आपसी विश्वास कितना जरूरी है ...
    मज़ा आया पढ़के ... ये ज्ञान फल का नतीजा है या कुछ और ... हा हा ... हो भी सकता है ... जब बिना फल खाए हब्बा शक करती थी तो अब तो सभी ने या फल खाया है ...

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