शुक्रवार, 9 मई 2014

माँ ..

            
  बिटिया ने बनाया हुआ स्केच !

सीता इतिहास मे 
हुयी भी थी या नहीं 
मुझे पता नही लेकिन,
उसके होने के जीवित 
प्रमाण मौजूद है 
आज भी माँ के 
अस्तित्व में !
न खुल कर कुछ 
कह पायी थी कभी 
न खुल कर हंस 
पायी थी कभी  
पिता के रामराज मे, 
कर्तव्यों की बलिवेदी पर 
अपनी भावनाओं की 
बलि चढ़ाती  माँ !
पिता के जाने के 
बरसो बाद भी 
न खुल कर कभी 
रो पाती है अपने 
बेटों के राज मे 
माँ … !!
                                      

शनिवार, 3 मई 2014

एक सुहानी शाम ...

एक सुहानी शाम 
बाहों में बाहें डाल  
मेरी प्यारी बिटिया ने कहा,
ममा तुम कितनी अच्छी हो 
कितनी प्यारी हो मुझे 
तुम पर है गर्व !
जब भी स्कूल से शाम 
घर आती हूँ  
लगता है घर स्वर्ग !
मै भी बड़ी होकर 
तुम्हारी जैसी बनूंगी 
कहलाउंगी गुणी !
कुछ उदास सी होकर
 मै उसको बोली 
बेटा,
छाया का क्या अस्तित्व 
कैसा जीवन ??
जब कि आत्मनिर्भरता का 
आज है जमाना !
अक्सर तेरे पापा देते है ताना 
सुबह अखबार भी छूती हूँ 
तो कहते है    … 
तुझे कौनसे दफ्तर है जाना 
दिनभर घर मे रहती हो 
आराम से पढ़ लेना !
गृहिणी के काम का न 
होता कोई मूल्यांकन 
न कोई प्रशंसा ! 
तभी कहती हूँ बेटा,
खूब पढ़ लिखकर 
डॉक्टर बनना इंजीनियर बनना 
मेरी जैसी नहीं 
तुम अपने जैसी बनना !
तुम मेरा प्रतिबिंब हो भले ही 
मेरी परछाई कभी न बनना ! 
बिटिया उसकी रुचि के अनुसार 
आज इंजीनियर बन गयी है !
पिछले तीन-चार महिने से 
एक प्रतिष्ठित कंपनी मे 
जॉब भी कर रही है !
अच्छे खासे पैसे कमा रही है 
एक राज की बात बताऊँ ?
आजकल वही मेरी 
ए टी एम भी है  … :)
कभी सुना था मैने  
बेटा अपने माता-पिता को 
स्वर्ग ले जाता है !
लेकिन आज देख रही हूँ 
बेटी स्वर्ग को ही 
घर पर लाते हुए ...
सुबह दो दो अख़बार 
के साथ      .... :)